साण्डेराव में विकसित होगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म
(सभी तस्वीरें- हलधर)सुमेरपुर क्षेत्र के साण्डेराव में प्रदेश व देश का एकमात्र ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म’ विकसित किया जाएगा। इस पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस केंद्र में राजस्थान की पारंपरिक एवं स्वदेशी पशु प्रजातियों के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक अनुसंधान का कार्य होगा । यह केन्द्र करीब 200 बीघा भूमि पर स्थापित किया जा रहा है। पशुपालन, मंत्री जोराराम कुमावत ने प्रशासनिक भवन का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया । केंद्र में गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट और घोड़े की 30 से अधिक स्वदेशी नस्लों के सुधार एवं संवर्धन पर शोध किए जाएंगे। इसे वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा के तहत धरातल पर उतारा जा रहा है। केन्द्र के दो वर्षों में तैयार होने की संभावना है ।
इन नस्लों पर रहेगा फोकस
केंद्र में गिर, राठी, थारपारकर, साहिवाल, नागौरी सहित विभिन्न गाय नस्लों पर अनुसंधान होगा। वहीं भैंस की मुर्रा, जाफराबादी और मेहसाना, भेड़ की मगरा, मारवाड़ी और सोनाड़ी, सिरोही की बकरी, जखराना और सोजत, ऊंट जैसलमेरी और बीकानेरी तथा मारवाड़ी घोड़े के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। दुनिया की सबसे छोटी गाय मानी जाने वाली पुंगनूर नस्ल के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष शोध किया जाएगा।
पशुपालकों को देंगे प्रशिक्षण
इस केंद्र पर पशुपालकों के लिए आधुनिक तकनीक और उद्यमिता का प्रशिक्षण स्थल भी तैयार किया जाएगा। जहां नियमित प्रशिक्षण शिविर होंगे। पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराए जाएंगे। पशुपालन आधारित स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
पद भी किए स्वीकृत
केन्द्र के लिए सरकार की ओर से 15 पद सृजित किए हैं। जिनमें 7 स्थायी और 8 संविदा पद हैं। इसके अलावा पूरे परिसर को पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा। केन्द्र में सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। वर्षा जल संचयन की उन्नत व्यवस्था विकसित की जाएगी। पर्यटन के लिए भी विशेष कार्य होगा।