कपास-मिर्च में नई सिंचाई तकनीक, जमीन के नीचे ड्रिप से बचेगा 17% पानी

नई दिल्ली 10-Aug-2026 01:04 PM

कपास-मिर्च में नई सिंचाई तकनीक, जमीन के नीचे ड्रिप से बचेगा 17% पानी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा
जयपुर। अल नीनों के कारण पूरा प्रदेश कम मानसून से जूझ रहा है। जारी बरसात के दौर से खरीफ फसल पककर तैयार होगी अथवा नहीं? इस बात पर अभी संशय बना हुआ है। इसी बीच किसानों के लिए खुशखबर सामन आई है। गौरतलब है कि कपास और मिर्च पर रिसर्च पूरा करने के बाद कृषि अनुसंधान केन्द्र, श्रीगंगानगर के वैज्ञानिकों ने सब्जी फसल फूलगोभी, बैंगन, टमाटर और भिंड़ी पर जल बचत के लिए ड्रिप सिंचाई पर रिसर्च शुरू किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कपास और मिर्च उत्पादन में ड्रिप सिंचाई के सकारात्मक परिणाम सामने आए है। इन दोनों फसलों में ड्रिप के उपयोग से जलबचत के साथ-साथ मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन की भी बड़ी बचत देखने को मिली है। वहीं, वाष्पोत्सर्जन दर में भी कमी आई है। गौरतलब है कि तीन साल चले रिसर्च के बाद एआएस के वैज्ञानिको ने रिसर्च डाटा साझा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सतही जल की तुलना में कपास फसल में 17 फीसदी जल की बचत हुई है। उन्होंने बताया कि बचत का यह आंकड़ा ड्रिप बिछाने का तरीका बदलने से सामने आया है। बता दें कि प्रदेश के साथ-साथ देश के मैदानी इलाकों में सतही पलावन विधी का प्रचलन है, जिसके परिणामस्वरूप पानी के उपयोग की दक्षता कम होती है और भूजल संसाधनों पर जोखिम बढ़ता है। 

अपनाया अधो-सतही तरीका

एआरएस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लोकेश कुमार जैन ने बताया कि कपास और मिर्च की फसल में अधो सतही तरीके से ड्रिप का उपयोग किया गया। कपास फसल में सतह से 14 सेमी नीचे ड्रिप बिछाई गई। इससे करीब 17 फीसदी जल बचत होना सामने आया है। उन्होंने बताया कि यह तरीका सब्जी फसलो के साथ-साथ मक्का और मूंगफली जैसी फसलों के लिए भी कारगर है। 

किसान को लाभ

अधो-सतही ड्रिव सिंचाई पद्धति से जल दक्षता बढने के साथ-साथ रोशनी, तापमान और पानी मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है। किसान को लेटरल को इक करने की ज़रूरत नहीं रहती। जड़ क्षेत्र में पानी और पोषक तत्वों आसानी तक पहुंचते है। वहीं, मिट्टी से वाष्पीकरण कम होता है। इस तरीके से मिट्टी के भौतिक-रासायनिक गुणों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही, खरपतवार की समस्या भी सामने नहीं आती है।  

यह रहे रिसर्च परिणाम

एआरएस पर बीटी कपास और मिर्च फसल में पानी और फसल उत्पादकता पर सतही ड्रिप और अधो-सतही ड्रिप प्रणाली पर अध्ययन किया। इन फसलों में लेटरल्स को जमीन के नीचे 14 सेमी की गहराई पर लगाया गया है। परिणामों रहा कि सतही प्रणाली प्रयोग की तुलना में, 0.8 प्रतिशत वाष्पोत्सर्जन, एनपीके फर्टिगेशन से सिंचाई जल उत्पादकता में 118 प्रतिशत कुल जल उत्पादकता में 45 प्रतिशत और सिस्टम उत्पादकता में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। 

टिकाऊ खेती की ओर कदम

इन सभी बातों को एक साथ देखें तो, यह सिंचाई प्रणाली एक सटीक और असरदार सिंचाई तकनीक है जो टिकाऊ खेती और पानी की कमी को दूर करने के लिए ज़रूरी है। साथ ही, पोषक तत्वों की कमी को भी दूर करती है, जिससे बायोमास और फसल की पैदावार बढ़ती है।


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