प्रोफाइल चमकाने वाले कृषि वैज्ञानिकों का खेल खत्म? अब नहीं चलेगी चापलूसी
प्रोफाइल चमकाने वाले कृषि वैज्ञानिकों का खेल खत्म? अब नहीं चलेगी चापलूसी
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। अगर, कागजी रिसर्च के दम पर आईसीएआर संस्थान में निदेशक अथवा अन्य पद का लाभ लेना चाह रहे है तो सावधान हो जाइए। क्योंकि, अब ऐसे रिसर्च के दम पर मलाईदार पोस्ट पाने वालो का खेल खत्म हो चुका है। अब नियुक्ति का असली पैमाना मैदानी रिसर्च होगा। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर आईसीएआर ने नई नियुक्ति और प्रमोशन के मामले में यह फार्मूला अपनाया है। ताकि, लैब टू लैंड के इस नारे को हकीकत में बदला जा सके।
कमेटी की रिपोर्ट पर फैसला
दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश के नेतृत्व में कृषि मंत्री चौहान ने जुलाई 2025 में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में व्यक्तिगत पुरस्कारों के नंबर काटकर, अब उन कर्मठ वैज्ञानिकों को रिमोट एरिया बोनस यानी अतिरिक्त बोनस नंबर दिया जाएगा जो दूरस्थ, पिछड़े और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में जाकर सीधे किसानों के बीच काम करते हैं और उनकी फसलों को बचाने में मदद करते हैं।
मौलिक खोज पर जोर
कृषि विज्ञान की तरक्की के बाद भी फसलों में कई ऐसी बीमारियां है, जो अब भी लाइलाज बनी हुई है। पूछने पर वैज्ञानिक शोध के बजाएं फौरे उपाय गिनाते है। इससे कृषि में रसायन की मात्रा बढ़ रही है। साथ ही, किसान की आर्थिक स्थिति भी पतली हो रही है। वैज्ञानिक नियुक्ति की पुरानी परिपाटी को दुरूस्त करने के लिए सरकार ने यह तरीका अपनाया है।