नौकरी छोड़ी, थाईलैंड घूमे, लौटकर खड़ा किया लाखों की कमाई वाला पॉलीहाउस

नई दिल्ली 10-Aug-2026 12:56 PM

नौकरी छोड़ी, थाईलैंड घूमे, लौटकर खड़ा किया लाखों की कमाई वाला पॉलीहाउस

(सभी तस्वीरें- हलधर)

भीलवाड़ा। जीवन दर्शन की यह कहानी है किसान सत्यनारायण धाकड़ की। जो सालभर के भीतर ही रोडवेज की नौकरी से ऊब गए। फिर, दिल्ली में चार साल काम किया। यहां से गांव लौटे और थाईलैंड घूमने निकल गए। लेकिन, यहां से अपने साथ ले आए एक उत्साह और आधुनिक कृषि तकनीक। परिणाम रहा कि अब हाईटेक खेती से बेहत्तर पैसा कमा रहे है। गौरतलब है कि किसान सत्यनारायण को खेती से सालाना 19-20 लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। किसान सत्यनारायण ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास तीन एकड़ कृषि भूमि है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के चलते वाणिज्य से स्नातक किया। इसके बाद रोडवेज में नौकरी लग गई। साल भर यह नौकरी की। लेकिन, नौकरी छोडक़र दिल्ली चला गया और एक कंपनी में काम करने लगा। चार साल काम करने के बाद गांव लौट आया। यहां से थाईलैंड घूमने चला गया। यहां पर जीवन दर्शन हुआ और अपने साथ हाईटेक खेती की जानकारी लेकर लौटा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में हाईटेक ख्ेाती की शुरूआत पुराने पॉली हाउस से हुई। इसके दो साल बाद उद्यानिकी विभाग की अनुदान सहायता से 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में नया पॉली हाउस बनकर तैयार हो गया। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस बनने के बाद आय का आंकड़ा कई गुना बढ़ चुका है। पहले तीन एकड़ जमीन से सालाना दो से ढ़ाई लाख रूपए की बचत मिलती थी। उन्होंने बताा कि सिंचाई के लिए मेरे पास एक ट्यूबवैल और कुआं है। परम्परागत फसलों में गेहूं, जौ, चना, मक्का, मंूगफली का उत्पादन लेता हॅू। 

एक फसल से 8 लाख

उन्होंने बताया कि पहले दोनों पॉली हाउस में खीरा फसल का उत्पादन लेता था। लेकिन, लेबर की समस्या के चलते एक पॉली हाउस को हटा दिया। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में खीरे की दो फसल लेता हॅू। एक फसल से 8 लाख रूपए का मुनाफा मिल जाता है। 

एक एकड़ में सब्जी उत्पादन

उन्होने बताया कि पॉली हाउस के अलावा ओपन फील्ड में एक एकड़ क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। सब्जी फसलों में खरबूज, लौकी और तरककड़ी का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 3 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

उन्नत पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुपालन में 2 गाय और 2 भैंस मेरे पास है। प्रतिदिन 10-15 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध डेयरी को बिक्री कर देता हॅू। दुग्ध बिक्री से मासिक 6 हजार रूपए की बचत मिल जाती है। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद, वनस्पति काढ़ा तैयार करके उपयोग ले रहा हॅू।


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