पहले बांधते थे मोटर, अब खेती से 5 लाख

नई दिल्ली 09-Apr-2026 02:19 PM

पहले बांधते थे मोटर, अब खेती से 5 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

फलीचड़ा, उदयपुर। हौंसला है तो बुलंदियां छूने में ज्यादा समय नहीं लगता। यह साबित कर दिखाया है किसान विजयराम जाट ने। नींबू की खेती में नुकसान खाने के बाद भी इनके हौंसले कम नहीं हुए। क्योंकि, पिछले साल ही आंवला के 300 पौधें लगाए है। इसी के साथ खेत में आंवला पौधों की संख्या 750 हो चुकी है। हालांकि, नए-पुराने पौधों से अभी आमदनी नहीं मिली है। लेकिन, टिकाऊ आय की गणित खेतों में लिखी जा चुकी है। वर्तमान में 5 लाख रूपए की आय विजयराम को मिल रही है। किसान विजयराम ने हलधर टाइम्स को बताया कि हम तीन भाईयों के बीच 40 बीघा कृषि भूमि है। उन्होने बताा कि 10वीं पास करने के बाद मोटर बांइडिग़ का काम शुरू किया। साथ ही, खेती के काम में भी हाथ बटाता रहा। लेकिन, अब पूरी तरह से खेती से जुड़ चुका हूॅ। इससे खेतों में नवाचार भी नजर आने लगे है। खेत समन्वित कृषि की कहानी बयां करने लगे है। उन्होंने बताया कि सिंचाई केलिए कुआं है। लेकिन, समय के साथ पानी रीत गया। इसके चलते परम्परागत फसल उत्पादन पर भी संकट गहरा गया। इसके बाद ट्यूबवैल खुदवाया। लेकिन, पानी की पीड़ बनी रही। इसकों देखते हुए सामुदायिक फार्म पौंड का निर्माण करवाया। इससे अब रबी-खरीफ फसलो का अच्छा उत्पादन मिलने लगा है। साथ ही, जायद मौसम में सब्जी उत्पादन की तैयारी भी शुरू कर चुका हॅू। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, सरसों, मसूर, मक्का, मूंगफली, सोयाबीन का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से खर्च निकालने के बाद 3 से साढे तीन लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। विद्युत बचत के लिए सौर उर्जा पम्प और जल बचत के लिए ड्रिप लगाई हुइ है।
 
आंवले का बगीचा
उन्होंने बताया कि आय बढौत्तरी के लिए नींबू और आंवला का बगीचा स्थापित किया। लेकिन, नींबू के पौधें गुणवत्ताहीन निकलने के कारण 2 हैक्टयर क्षेत्र का बगीचा नष्ट करना पड़ा। जबकि, आंवले के 450 पौधेें तीन साल के हो चुके है। उन्होने बताया कि नींबू के पौधें नष्ट करने के बाद पिछले साल आंवले के 300 पौधें और लगाएं है। 

पशुपालन लाभकारी
खेती से अतिरिक्त आमदनी पाने के लिए पशुपालन का कार्य शुरू किया। वर्तमान में मेरे पास 5 एचएफ गाय है। प्रतिदिन 20 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध डेयरी को 40-45 रूपए प्रति लीटर की दर से विपणन कर देता हॅू। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी खाद तैयार कर रहा हॅू। वर्मी कम्पोस्ट की दो बेड मेरे पास है। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. दीपक जैन, केवीके, उदयपुर


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कहते है कि परिवार के आर्थिक हालात ठीक नही हो तो सफलता के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। किसान औंकारमल मेघवाल के साथ भी यही हुआ है। औंकार ने बताया कि पहले खेतों से पैदावार कम मिलती थी। इससे परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल लगता था। मजबूरी में रोटी-रोटी की तलाश ने मुझे दुबई पहुंचा दिया। आठ साल में जो कमाया, यहां लौटकर खेतों में निवेश किया। इसी का परिणाम है कि अब खेतों से 10-12 लाख रूपए सालाना की आमदनी मिल रही है। गौरतलब है कि किसान औकारमल डेढ़ दशक से सब्जी फसलो की खेती कर रहे है। साथ ही, इन्होने प्रति बीघा परम्परागत फसलों का उत्पादन बढ़ाने में भी सफलता पाई है। मोबाइल 9983231901