चूड़ी नहीं, प्राकृतिक में चमके बाबू, कमाई 3 लाख

नई दिल्ली 29-Nov-2025 01:36 PM

चूड़ी नहीं, प्राकृतिक में चमके बाबू, कमाई 3 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

कांगड़दा, पाली। बालपन से चूड़ी चमकाने वाले हाथ अब प्राकृतिक में अपनी चमक बिखेर रहे है। इससे ना केवल आय के आंकड़े में बढौत्तरी दर्ज हो रही है। वहीं, अलग पहचान भी बन रही है। सफलता की इस कहानी के नायक है बाबूलाल मीणा। जिन्होने स्कूल की उम्र में खुद को चूड़ी बनाने के कारखाने में पाया। डेढ दशक तक काम करने के बाद भी जब आर्थिकी की सूरत नहीं बदली तो प्राकृतिक उपजाना शुरू कर दिया। इससे अब सालाना तीन लाख रूपए की आय मिलने लगी है। किसान बाबूलाल मीणा ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 6 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि जमीन बारानी होने के चलते पहले परिवार की माली हालत काफी खराब थी। इस कारण कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। किताब पढऩे की जगह सूरत-गुजरात में चूड़ी बनाने का आखर पढ़ा। करीब डेढ़ दशक तक यह काम करने के बावजूद परिवार की आर्थिक स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं आया। इस कारण गांव लौट आया। यहां आकर जमा पूंजी से कुआं खुदवाया। बाद में एक गैर सरकारी संस्था से सम्पर्क हुआ और जैविक प्राकृतिक खेती की अलख जगी। इस कार्य में काजरी कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों का भी साथ मिला। इससे हौंसला बढ़ा। शायद यही कारण है कि किसान बाबूलाल के खेत अब समन्वित की कहानी कह रहे है। जमीन का रकबा कम है। लेकिन, आय का आंकड़ा पहले से काफी बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में मक्का, उड़द, मंूग, सरसों और गेहूं का उत्पादन लेता हॅॅू। इन फसलों से 70-80 हजार रूपए की आय मिल जाती है। गौरतलब है कि किसान बाबूलाल का एक बेटा बीएड़ कर रहा है। वहीं, छोटा बेटा 12वीं में है।

सब्जी बनी सहारा

उन्होने बताया कि केवीके से जुडऩे के बाद सब्जी फसलो का उत्पादन लेना शुरू किया। सब्जी फसलों में गोभी, चुकंदर, टमाटर, ग्वार और भिंड़ी की फसल शामिल है। इन फसलों से 30 से 40 हजार रूपए की आय मिल जाती है।

डेयरी से अच्छा लाभ,

उन्होंने बताया कि पशुपालन में मेरे पास 3 गाय और तीन भैंस है। इस व्यवसाय से प्रतिदिन 600-700 रूपए की आमदनी मिल जाती है। इससे परिवार को बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने बताया कि रोजाना 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। दुग्ध का विपणन डेयरी को करता हॅू। इसके अलावा एक डेयरी का दुग्ध संग्रहण केन्द्र भी मेरे पास है।

वर्मी खाद का उत्पादन

उन्होनें बताया कि पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करता हॅू। वर्मी की 6 बेड़ मेरे पास है। साथ ही, घन जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र सहित कई दूसरे प्राकृतिक आदान तैयार करके उपयोग ले रहा हॅू।

स्टोरीइनपुट: डॉ. चंदन गुप्ता, काजरी केवीके, पाली


ट्रेंडिंग ख़बरें