रसायन मुक्त खेतों से बढ़ी आमदनी

नई दिल्ली 25-May-2026 01:02 PM

रसायन मुक्त खेतों से बढ़ी आमदनी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नयागांव, चित्तौडग़ढ़। सब्जी भी आपको सम्मान दिला सकती है। यकीन नहीं है तो मिलिए किसान नानालाल धाकड़ से। इन्होंने परिवार की आर्थिक तस्वीर बदलने के लिए जायद सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। परिणाम रहा कि तकनीक आधारित खेती से ना केवल वार्षिक आय दोगुना हो गई। वहीं, जिला कलक्टर के हाथों आत्मा किसान पुरस्कार से भी सम्मानित हुए। बता दें कि किसान नानालाल को खेती से सालाना 8-10 लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। किसान नानालाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 12 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि 9वीं पास करने के साथ ही पढ़ाई छोड़ दी और खेती से जुड़ गया। पहले परम्परागत तौर-तरीके  से परम्परागत फसलों के उत्पादन तक सीमित रहा। लेकिन, कृषि कार्यक्रमों में जाने की बदौलत आधुनिक कृषि तकनीक के बारे मेंं पता चला और कई किसानों की आय बढते हुए भी देखी। इसके बाद जमीन के छोटे से टुकड़े में जायद सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। इन फसलों से अच्छी आमदनी मिली तो हौंसला बढ़ता गया और अब परिणाम सबके सामने है। इन फसलों से सालाना 6-7 लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। गौरतलब है कि किसान नानालाल के पास 12 बीघा जमीन है और सिंचाई के लिए ट्यूबवैल है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में चना, मक्का, मूंगफली, गेहूं और सरसों का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना डेढ़ से दो लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। गौरतलब है कि किसान नानालाल को हाल ही में जिला कलक्टर ने जिला स्तरीय आत्मा किसान पुरस्कार से सम्मानित किया है। 

बिस्वा से सब्जी की शुरूआत
उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों की शुरूआत 5-6 बिस्वा जमीन से की थी । समय के साथ क्षेत्रफल भी बढ़ाया। उन्होंने बताया कि जायद फसलों की अगेती खेती करता हॅू। इससे भाव अच्छे मिलते है। उन्होंने बताया कि सब्जी फसल में खरबूजा, खीरा, लौकी, कद्दू, मिर्च, करेला, लहसुन की फसल शामिल है। इसके अलावा किनवा और चिया की फसल भी ले रहा हॅू। उन्होने बताया कि सब्जी फसल में ड्रिप और मल्च का उपयोग कर रहा हूॅ। इन फसलों से सालाना 6-7 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

उन्नत पशुधन
उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 8 भैंस, 4 गाय है। प्रतिदिन 24-25 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। परिवार की आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध की बिक्री उपभोक्ताओं को 60-65 रूपए प्रति लीटर की दर से कर देता हॅू। खर्च निकालने के बाद दुग्ध उत्पादन से 15-16 हजार रूपए की शुद्ध बचत मिल जाती है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके सब्जी फसलों में उपयोग कर रहा हॅू।

स्टोरी इनपुट: डॉ. एसएल जाट, संयुक्त निदेशक कृषि, चित्तौडग़ढ़ 


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