10 बीघा नहीं, झोपड़ी काफी: मशरूम से बदली किस्मत
(सभी तस्वीरें- हलधर)
पिपरड़ा, राजसमंद। गांव में रहकर भी आमदनी को बढाया जा सकता है। क्षेत्रीय युवाओं को आय बढौत्तरी की राह दिखाने का ऐसा ही प्रयास किया है किसान कमलेश जाट ने। जिन्होंने बटन मशरूम की खेती करके खेती से अतिरिक्त कमाई का जरिया अपने लिया तलाश लिया है। उनका कहना है कि झोपड़ी में तैयार हो रही मशरूम 150 रूपए प्रति किलो के भाव से बिक्री हो रही है। जबकि, किसान कमलेश की खेती से सकल आय का आंकड़ा सालाना 2 लाख रूपए के करीब है। किसान कमलेश ने हलधर टाइम्स को बताया कि मशरूम उत्पादन के बारे में पहले सुना ही था। लेकिन, तीन-चार साल पहले एक दोस्त को किसी के मशरूम फार्म पर काम करने का मौका मिला। इसके बाद कृषि विज्ञान केन्द्र से हमने सम्पर्क किया। यहां से तकनीक जानकारी मिलने के बाद इस साल 40 गुना 24 के शैड में बटन मशरूम का उत्पादन लेना शुरू किया। उन्होने बताया कि मशरूम का उत्पादन जारी है। अब तक 35 हजार रूपए की आमदनी प्राप्त हो चुकी है। उम्मीद है कि मशरूम की खेती से डेढ़ से दो लाख रूपए की अतरिक्त आमदनी प्राप्त हो जायेगी।
परम्परागत से प्रति बीघा 20 हजार
गौरतलब है कि किसान कमलेश खेती से जुडऩे से पूर्व एक कंपनी में मैकेनिक का काम करते थे। नौकरी के बाद मासिक 8 हजार तनख्वा मिलती थी। उन्होने बताया समय के साथ बढे परिवार के खर्च ने मुझे ख्ेाती से जुडऩे का मजबूर कर दिया। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलो में गेहूं, गन्ना, जौ, चिया, मक्क और ज्वार का उत्पादन लेता हॅॅू। इन फसलों से सालाना 2 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। गौरतलब है कि किसान कमलेश के पास 10 बीघा जमीन है। इसमें से 5 बीघा जमीन बंजर है। इस कारण 5 बीघा में ही खेती हो पाती है।

उन्नत पशुधन
उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 6 गाय है। प्रतिदिन 15-20 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध डेयरी को 40 रूपए प्रति किलो के भाव से बिक्री कर रहा हॅू। इससे मासिक 7-8 हजार रूपए की बचत मिल जाती है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. पीसी रैगर, केवीके, राजसमंद