मॉनसून की सुस्ती से खेती पर बड़ा संकट! 92 लाख हेक्टेयर कम हुई बुवाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)कम बारिश ने खरीफ सीजन की रफ्तार रोकी, धान, दालें, तिलहन और कपास की बुवाई में भारी गिरावट। अगर जल्द नहीं बरसे बादल, तो किसानों के साथ आम जनता की जेब पर भी पड़ सकता है असर।
मॉनसून की बेरुखी से धीमी पड़ी खरीफ की बुवाई
देशभर में मॉनसून की कमजोर शुरुआत ने खरीफ सीजन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के 5 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 92 लाख हेक्टेयर कम दर्ज किया गया है। जून में सामान्य से लगभग 33 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन सकी, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को बुवाई टालनी पड़ी। इसका सबसे ज्यादा असर सोयाबीन और धान जैसी प्रमुख फसलों पर देखने को मिला है।
क्या महंगी हो जाएगी आम आदमी की थाली?
अगर आने वाले दिनों में मॉनसून सामान्य नहीं हुआ, तो खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे अनाज, दाल, खाद्य तेल और अन्य जरूरी कृषि उत्पादों की आपूर्ति घटने की आशंका बढ़ जाएगी। नतीजतन, बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका असर किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ेगा।
धान की रोपाई में 9 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की गिरावट
धान की रोपाई इस साल 60.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 69.30 लाख हेक्टेयर थी। यानी धान का रकबा 9.06 लाख हेक्टेयर कम रहा। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि जुलाई में अच्छी बारिश होने पर यह अंतर कुछ कम हो सकता है।
दालों की खेती भी पिछड़ी
दालों की बुवाई भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम रही है। इस बार 37.15 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जबकि पिछले साल यह 47.49 लाख हेक्टेयर थी। सबसे ज्यादा असर अरहर, उड़द और मूंग की खेती पर देखा गया, जबकि मोठ की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई।
मोटे अनाज और बाजरा भी प्रभावित
श्री अन्न यानी मोटे अनाज की खेती भी मॉनसून की कमी से प्रभावित हुई है। कुल रकबा 71.86 लाख हेक्टेयर से घटकर 60.12 लाख हेक्टेयर रह गया। सबसे बड़ी गिरावट बाजरा में दर्ज की गई, जबकि मक्का की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में कम रही।
तिलहन में सबसे बड़ा झटका
खरीफ सीजन में सबसे ज्यादा नुकसान तिलहन फसलों को हुआ है। इस साल तिलहन का कुल रकबा 109.27 लाख हेक्टेयर से घटकर 66.31 लाख हेक्टेयर रह गया। इसकी सबसे बड़ी वजह सोयाबीन की बुवाई में भारी गिरावट है, जिसका रकबा 79.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 47.80 लाख हेक्टेयर रह गया। वहीं मूंगफली की खेती भी काफी कम हुई है।
कपास की खेती भी पीछे
कपास की बुवाई इस साल 63.18 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 82 लाख हेक्टेयर थी। यानी करीब 18.82 लाख हेक्टेयर का बड़ा अंतर दर्ज किया गया है।
गन्ना और जूट बने राहत की खबर
जहां अधिकांश खरीफ फसलों की बुवाई घटी है, वहीं गन्ना और जूट की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर और जूट एवं मेस्टा का रकबा 6.28 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।