सहजन की वैज्ञानिक खेती: कम लागत में लाखों की कमाई

नई दिल्ली 11-Jul-2026 05:02 PM

सहजन की वैज्ञानिक खेती: कम लागत में लाखों की कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सहजन की खेती से अच्छी आय को देखते हुए देशभर में इसकी खेती का रकबा बढ़ता जा रहा है। इसके कई स्वास्थ्यवर्द्धक उत्पाद भी बाजार में आ रहे हैं। यह एक पौष्टिक सब्जी फसल के रूप में सर्वत्र उपलब्ध है। दक्षिणी राज्यों में इसकी वर्षभर खेती की जाती है। वहीं, दूसरे राज्यों में एक ही फसल किसानों को मिल पाती है। आपको बता दें कि इसकी पत्ती, छाल, फूल और फलियां पोषण से भरपूर है। जो मनुष्य के साथ-साथ पशुधन को भी बेहतर पोषण देती है। सहजन का मूल उत्पत्ति स्थल भारत है। इसके पौधे की लम्बाई 10 मीटर तक होती है। तना कमजोर और पत्तियां छोटी होती हैं। इसकी खेती के लिए ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। सहजन को 300 रोगों का रामबाण माना गया है। इसमें प्रोटीन, लवण, आयरन, विटामिन बी, सी के अलावा 92 तरह के मल्टी विटामिन्स, 46 तरह के एंटीऑक्सीडेंट, 36 तरह के दर्द निवारक और 18 तरह के एमीनो एसिड मिलते हैं।

  • उन्नत किस्म - पीकेएम-1, पीकेएम-2 और केकेएम-1
  • भूमि - रेतीली दोमट, पीएच- 6.5 से 8
  • बुआई - जुलाई-अक्टूबर।
  • बीज दर - 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर

रोपण

सहजन का रोपण बीज और कलम दोनों विधियों से किया जा सकता है। बीज की सीधी बुआई 2.5 से 3 सेमी की गहराई पर करें। रोपण हेतु 2.5 गुना 2.5 मीटर दूरी अनुशंसित है। घर के उपयोग हेतु खेत की मेढ़ पर भी पौधों का रोपण किया जा सकता है। रोपण के लिए गड्ढे का आकार 45 गुना 45 गुना 45 सेमी रखें।

खाद-उर्वरक

व्यवसायिक दृष्टिकोण से खेती करने पर 8-10 किग्रा गोबर खाद प्रति पौधा रोपण के समय और 50 किग्रा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश प्रति हेक्टेयर प्रति 6 माह के अंतराल से उपयोग करें। सिंचाई- बुआई से पहले और बुआई के 3 दिन बाद। बाद में 10-15 दिन के अंतराल पर।


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