MSP सिर्फ कागजों तक? मंडियों में औंधे मुंह गिरे दाम, किसान परेशान 

नई दिल्ली 11-Jul-2026 01:33 PM

MSP सिर्फ कागजों तक? मंडियों में औंधे मुंह गिरे दाम, किसान परेशान 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

रागी, मूंग, बाजरा, गेहूं, मक्का और चना समेत कई फसलों के बाजार भाव MSP से नीचे। ताजा मंडी आंकड़ों ने किसानों की आय और सरकारी खरीद व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल।देशभर के किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। 6 जुलाई 2026 तक के अखिल भारतीय मंडी थोक मूल्य (All India Mandi Wholesale Prices) के अनुसार, कई प्रमुख फसलों के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी नीचे चल रहे हैं। सबसे ज्यादा गिरावट रागी, मूंग और बाजरा जैसी फसलों में दर्ज की गई है। ऐसे में किसानों को अपनी मेहनत का पूरा दाम नहीं मिल पा रहा और उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

रागी में सबसे बड़ा झटका

सरकार ने रागी का MSP 4,886 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन मंडियों में इसका औसत भाव केवल 3,293 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। यानी किसानों को 1,593 रुपये प्रति क्विंटल (करीब 32.60%) का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह सभी प्रमुख फसलों में सबसे बड़ी गिरावट है।

मूंग और बाजरा के किसानों की भी बढ़ी मुश्किलें

मूंग का MSP 8,768 रुपये है, जबकि मंडियों में औसत भाव 6,641 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। यानी किसानों को 2,127 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत मिल रही है। वहीं बाजरा का MSP 2,775 रुपये है, लेकिन बाजार में इसका औसत भाव 2,212 रुपये प्रति क्विंटल है, जो MSP से 563 रुपये कम है।

गेहूं, मक्का और चना भी MSP से नीचे

स्थिति केवल मोटे अनाज तक सीमित नहीं है। मक्का का MSP 2,400 रुपये है, जबकि औसत मंडी भाव 1,982 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। गेहूं का MSP 2,585 रुपये होने के बावजूद किसानों को औसतन 2,507 रुपये ही मिल रहे हैं। इसी तरह चना का MSP 5,875 रुपये है, जबकि मंडियों में औसत भाव 5,618 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

तिलहन फसलों में भी राहत नहीं

तिलहन फसलों के किसानों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। मूंगफली का MSP 7,263 रुपये है, लेकिन मंडियों में औसत भाव 7,096 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं सूरजमुखी का MSP 7,721 रुपये तय है, जबकि औसत बाजार भाव 7,611 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

क्यों बढ़ रही है किसानों की चिंता?

जब बाजार में फसलों के दाम लगातार MSP से नीचे बने रहते हैं, तो किसानों की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी खरीद व्यवस्था प्रभावी नहीं रही और MSP पर खरीद नहीं बढ़ी, तो किसानों की आय पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।


ट्रेंडिंग ख़बरें