20 बीघा में 20 लाख! किसान देशराज की कमाई का राज

नई दिल्ली 17-Feb-2026 12:37 PM

20 बीघा में 20 लाख! किसान देशराज की कमाई का राज

(सभी तस्वीरें- हलधर)

रानपुर, कोटा। खेती से लाभ कमाने का जुनून हो तो किसान करत-करत अभ्यास... की तर्ज पर बहुत जल्दी समृद्धि पा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है किसान देशराज सुमन ने। जिन्होंने संरक्षित खेती के साथ-साथ पशुपालन को व्यवसाय का रूप दिया। साथ ही, सब्जी और बागवानी फसल उत्पादन की ओर भी कदम बढ़ाया। परिणाम रहा है कि रोजी-रोटी चलाने वाली जमीन से अब 18-20 लाख रूपए की बचत संभव हो रही है। किसान देशराज ने हलधर टाइम्स को बताया कि खेती में यह बदलाव महज 5-6 साल पुराना है। जबकि, संरक्षित खेती से जुड़ाव पिछले साल ही हुआ है। उन्होंने बताया कि मेरे पास 20 बीघा जमीन है। पहले परिवार संयुक्त रूप से रहता था। इस कारण खेती में आदमी कम, काम ज्यादा जैसी स्थिति थी। इस कारण स्नातक द्वितीय वर्ष में भी पढ़ाई छोडक़र खेती से जुड़ गया। उन्होंने बताया कि पहले परम्परागत फसलों के उत्पादन तक सीमित रहा। लेकिन, इससे केवल परिवार का गुजारा ही चल पाता था। इसके बाद मैदानी सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। इससे आमदनी में बढौत्तरी देखने को मिली। इसके बाद मिश्रित बागवानी और फिर पशुपालन का रूख किया। इससे समय के साथ आमदनी का आंकड़ा बढ़ता चला गया। अब संरक्षित खेती से लाखों रूपए की आय मिलने लगी है। इससे आय के आंकडे में बूम देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं, ट्यूबवैल है। जल बचत के लिए ड्रिप और फव्वारा सिंचाई का उपयोग कर रहा हॅू। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, सेायाबीन, मक्का, धान का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना दो से ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

8 बीघा में सब्जी उत्पादन

उन्होंने बताया कि सब्जी उत्पादन का काम सालभर चलता रहता है। करीब 8 बीघा क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन लेता हॅॅू। सब्जी में लहसुन, आलू, मटर, प्याज, भंवरलाठ की फली आदि फसल शामिल है। उन्होंने बताया कि इन फसलों से सालाना 4-5 लाख रूपए की आय हो जाती है। इसके अलावा बागवानी में नींबू के 120 पौधें, आम के 50 , अमरूद-अनार-पपीता के 10-10 और कटहल का एक पौधा मेरे पास है। इससे भी ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

शैडनेट में खीरा उत्पादन

उन्होंने बताया कि जून 2025 में चार हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में उद्यानिकी विभाग की सहायता से शैडनेट हाउस स्थापित करवाया है। इसमें खीरे की फसल ले रहा हॅॅू। अब तक डेढ़ लाख रूपए की आमदनी हो चुकी है। उन्होने बताया कि शैडनेट से शुद्ध तीन लाख रूपए की बचत मिलने का अनुमान है। 

मिनी डेयरी भी

उन्होंने बताया कि आय बढौत्तरी के लिए पशुपालन को भी व्यवसाय का रूप दिया है। पशुपालन में मेरे पास 10 भैंस और एक दर्जन गाय है। प्रतिदिन 50 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। दुग्ध की बिक्री उपभोक्ताओं को 60 से 80 रूपए प्रति लीटर की दर से कर रहा हॅू। इससे भी मासिक 40-42 हजार रूपए की बचत मिल जाती है। उन्होने बताया कि पशु अपशिष्ट का उपयोग गोबर गैस प्लांट में कर रहा हॅू। इससे निकलने वाली स्लरी खाद के रूप में खेतों में काम जाती है। वहीं, वर्मी कम्पोस्ट की 8 बेड़ मेरे पास है। 

स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक उद्यान, कोटा


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इंजीनियरिंग करके दो साल के भीतर ही नौकरी को टाटा, बाय-बाय कहने वाला यह किसान है सतीश पवार। जो साल में तीन फसलो का उत्पादन लेकर कृषिगत बचत का आंकड़ा दोगुना कर चुका है। कोटा क्षेत्र में सतीश ने आलू और जायद फसलों के उत्पादन में अलग पहचान बनाई है। सतीश का कहना है कि नौकरी से जरूरतें पूरी होती। कभी, समृद्धि की झलक देखने को नहीं मिल पाती। अब परिवार के साथ रहकर जीवन का असली सावन देख रहा हॅू। उन्होने बताया कि मुझे नई पहचान और कृषि आय को नया फलक देने में कृषि वैज्ञानिको का मार्गदर्शन भी मेरे लिए अमूल्य है। गौरतलब है कि सतीश खरीफ में धान, रबी में आलू और जायद में खरबूज सहित दूसरी सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहे है। जिससे सालाना बचत का आंकड़ा 8-10 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। मोबाइल 78283-03623