ड्रिप सिंचाई अपना कर किसान ने खेती से सालाना कमाई दोगुनी की
(सभी तस्वीरें- हलधर)
भगवानपुरा, भीलवाड़ा। निरंतर मेहनत और नवाचारी सोच से कृषिगत आय का मंजर बदला जा सकता है। यकीन नहीं है तो मिलिए किसान गोविंद शर्मा से। जिन्होंने आधुनिक कृषि मशीनरी और ड्रिप के जरिए अपना लाभ बढ़ाया है। उनका कहना है कि दो-ढ़ाई लाख तक सीमित रहने वाली आय का आंकड़ा अब बढक़र 5-6 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। किसान गोविंद ने हलधर टाइम्स को बताया कि स्नातक करने के बाद पहले एक प्राईवेट कंपनी में नौकरी करने लगा। लेकिन, मन में कुछ नया करने की चाहत ने मुझे खेती से जोड़ दिया। अब बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, आरजिया के कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में जमीन को कृषि नवाचारों के लिए तैयार कर रहा हॅॅू। उन्होंने बताया कि परिवार के पास 15 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए ट्यूबवैल है। पहले भी जमीन पर परम्परागत फसलों का उत्पादन लेता था और अब भी वहीं कर रहा हॅू। लेकिन, आमदनी का आंकड़ा बढ़ चुका है। यह बदलाव आया है बूंद-बूंद सिंचाई से। उन्होंने बताया कि अनुसंधान केन्द्र से जुडऩे के बाद पावर वीडऱ, सहित कई सहायक कृषि मशीनो की खरीदी। साथ ही, 10 बीघा क्षेत्र में ड्रिप लगाई। इससे फसल जल की बचत हुई। साथ ही, सिंचाई की समस्या भी दूर हो गई। इससे कपास, मक्का, उड़द, चना, गेहूं, जौ आदि फसल की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पादन में बढौत्तरी देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि इन फसलों से सालाना 5 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
मेड़ पर फलदार पौधें
उन्होंने बताया कि मेड़ पर फलदार पौधें लगाएं हुए है। इनमें आम, अमरूद, जामुन, केला के पौधें शामिल है। इनसे भी सालाना 10-20 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
पशुपालन भी लाभकारी
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और 2 भैंस है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। पशुधन का खर्च निकालने के लिए एक समय का दुग्ध बिक्री कर देता हॅू। वहीं, परिवार की आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार करता हॅू। घी बिक्री से मिलने वाली राशि बचत हो जाती है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग ले रहा हॅू।
स्टोरी इनपुट: डॉ. केसी नागर, बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, आरजिया, भीलवाडा