खरी को बनाया जैविक, खेती से सालाना बचत पहुंची 30 लाख!

नई दिल्ली 03-Jun-2026 12:05 PM

खरी को बनाया जैविक, खेती से सालाना बचत पहुंची 30 लाख!

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पावटा, जयपुर। रासायनिक से जैविक के सफर में 10 फीसदी उत्पादन का नुकसान जरूर हुआ। लेकिन, इसका कोई गम नहीं हुआ। क्योंकि, मुझे बाजार में जैविक खीरे से 20 फीसदी ज्यादा आमदनी मिली। यह कहना है किसान नरपाल सिंह यादव का, जिन्होंने पॉली हाउस में फलने-फूलने वाले खीरे को भी जैविक बनाया है। गौरतलब है कि ओपन फील्ड सब्जी और संरक्षित खेती से नरपाल को सालाना 30 लाख रूपए का सालाना मुनाफा मिल रहा है। किसान नरपाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि स्नातकोत्तर करने के बाद कृषि आदान कम्पनियों में काम किया। लेकिन, कोविड-19 के बाद से खेती कर रहा हॅू। उन्होंने बताया कि परिवार के पास 10 बीघा पक्की जमीन है। मेरे खेती से जुडऩे से पहले परम्परागत फसलों का उत्पादन होता था। लेकिन, अब परम्परागत फसल 2 बीघा क्षेत्र में सिमट चुकी है। क्योंकि, इन फसलों में मेहनत और लागत ज्यादा है। जबकि, फ सलों के उत्पादन से आपकों चार गुना रिर्टन मिलता है। शायद यही कारण है कि जमीन का अधिकांश रकबा अब सब्जी फसलों के नाम हो चुका है। उन्होंने बताया कि पहले तो मैं भी दूसरे किसानों के जैसे ही रसायनिक खेती करता था। लेकिन, अब जैविक और प्राकृतिक की राह पकड़ चुका हॅू। फसल की बिक्री के दौरान जैविक का लाभ मुझे मिल रहा है।

चार दिन खराब नहीं होता खीरा
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में फार्मपौंड खुदवाने के साथ ही 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉली हाउस का निर्माण करवाया और खीरा फसल का उत्पादन करने लगा। उन्होंने बताया कि खेतों को जैविक बनाने की धुन में पॉली हाउस में कभी रसायन का उपयोग नहीं किया। समय के साथ बाजार में जैविक खीरे की मांग बढ़ी और मुझे उपज के डेढ़ गुना दाम मिलना शुरू हो गए। उन्होंने बताया कि साल में खीरे की दो फसल का उत्पादन लेता हॅू। सारा खर्च निक ालने के बाद पॉली हाउस से सालाना 20  लाख रूपए की बचत हो जाती है। उन्होंने बताया कि रसायन से तैयार खीरे की फसल जहां दो दिन में खराब हो जाती है। लेकिन, जैविक खीरे की चमक चार दिन से ज्यादा बनी रहती है। वहीं, स्वाद भी अच्छा बना रहता है। 

ओपन फील्ड में सब्जियां
उन्होंने बताया कि खेती संभालने के बाद मैने सब्जी फसलों की ओर रूख किया। मैदानी सब्जी फसलों में गोभी, तरबूज, टमाटर, गेंदा और मिर्च का करीब 8 बीघा पक्की जमीन में उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालभर में 10 लाख रूपए की शुद्ध बचत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि संरक्षित और मैदानी सब्जी फसलो में माइकोराइजा, स्यूडोमोनास, बायो एनपीके, ट्राईकोडर्मा, कें चुआ खाद और वेस्ट डीकम्पोजर का उपयोग करता हॅू। 

बना रहे है केंचुआ खाद
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास दो भैंस है। प्रतिदन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। लेकिन, दुग्ध की बिक्री नहीं करता हॅू। घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार करता हॅू। वहीं, पशु अपशिष्ट से केंचुआं खाद तैयार कर रहा हॅू। दो वर्मी बेड मेरे पास है।


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