सेल्समैन छोड़ खेती अपनाई, हीरालाल अब कमा रहे 6 लाख

नई दिल्ली 24-Jun-2026 04:48 PM

सेल्समैन छोड़ खेती अपनाई, हीरालाल अब कमा रहे 6 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

गुढाबढ़ावता, पाली। परम्परागत खेती में वैज्ञानिक तकनीक का समावेश करके किसान अपनी आय बढ़ा सकता है। यकीन नही आए तो मिलिए, किसान हीरालाल मीणा से। हीरालाल सब्जी उत्पादन के सहारे कृषिगत आय बढ़ाने के प्रयास में जुटे हुए है। इसी का परिणाम है कि आय का आंकड़ा पहले से बढक़र 5-6 लाख रूपए हो चुका है। जबकि, पहले सालाना डेढ़ से दो लाख रूपए की आय हीरा को मिलती थी। किसान हीरालाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 40 बीघा कृषि भूमि है। पिताजी के खेती संभालने तक 10वीं पास करने के बाद मैं रोजगार की तलाश में चैन्नई निकल गया। ज्वैलर्स के यहां सेल्समैन का काम करने लगा। पिताजी की बुर्जगावस्था को देखते हुए डेढ़ दशक बाद गांव लौट आया। खेती की जिम्मेदारी संभाली तो परम्परागत फसलों से मिलने वाले लाभ से दो चार हुआ। इस स्थिति को देखते हुए सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया। अब धीरे-धीरे सब्जी फसलों का रकबा बढ़ाता जा रहा हॅू। इससे आय के आंकड़े में सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में अरंड़ी, रायड़ा, गेहूं आदि फसलों का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना लाख से सवा लाख रूपए की आय मिल जाती है। सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है।

15 बीघा में मेहंदी

उन्होंने बताया कि खेती से जुडऩे के बाद परम्परागत फसल मेहंदी का दायरा भी बढ़ाया है। 8-9 बीघा क्षेत्र तक सीमित रहने वाली मेहंदी की फसल अब 15 बीघा क्षेत्र अपने नाम कर चुकी है। फसल से खर्च निकालने के बाद डेढ़ से दो लाख रूपए की आय मिल जाती है। 

सब्जी में यह फसलें

उन्होने बताया कि सब्जी फसलों में ग्वार, मिर्च, टमाटर, भिंड़ी का उत्पादन लेता हॅू। 4 बीघा क्षेत्र में मिर्च की फसल लगाई हुई है। इस फसल से खर्च निकालने के बाद लाख रूपए की आय मिल जाती है। पशुधन में मेरे पास एक गाय है। जिससे परिवार की दुग्ध आवश्यकता पूरी हो जाती है। 


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नौकरी को बाय-बाय: बीटेक पास उपजा रहा है खरबूज, सकल आय 10 लाख

इंजीनियरिंग करके दो साल के भीतर ही नौकरी को टाटा, बाय-बाय कहने वाला यह किसान है सतीश पवार। जो साल में तीन फसलो का उत्पादन लेकर कृषिगत बचत का आंकड़ा दोगुना कर चुका है। कोटा क्षेत्र में सतीश ने आलू और जायद फसलों के उत्पादन में अलग पहचान बनाई है। सतीश का कहना है कि नौकरी से जरूरतें पूरी होती। कभी, समृद्धि की झलक देखने को नहीं मिल पाती। अब परिवार के साथ रहकर जीवन का असली सावन देख रहा हॅू। उन्होने बताया कि मुझे नई पहचान और कृषि आय को नया फलक देने में कृषि वैज्ञानिको का मार्गदर्शन भी मेरे लिए अमूल्य है। गौरतलब है कि सतीश खरीफ में धान, रबी में आलू और जायद में खरबूज सहित दूसरी सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहे है। जिससे सालाना बचत का आंकड़ा 8-10 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। मोबाइल 78283-03623