बेर बागवानी ने बदली किसान की किस्मत, मजदूरी छोड़ कमाई 5 लाख 

नई दिल्ली 12-Aug-2026 11:48 AM

बेर बागवानी ने बदली किसान की किस्मत, मजदूरी छोड़ कमाई 5 लाख 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

गेहूं, बाड़मेर। पहले खेतों की आय से परिवार का खर्च भी नहीं निकलता था। घर खर्च चलाने के लिए करीब 4 दशक तक मजदूरी की। लेकिन, अब समन्वित कृषि से परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। इस आर्थिकी बदलाव में कृषि विज्ञान केन्द्र, गुड़ामालानी के वैज्ञानिकों का काफी सहयोग रहा है। यह कहना है किसान गिरधारी राम भांभू का। जो अब खेती से सालाना 4-5 लाख रूपए की आमदनी लें रहे है। जबकि, पहले बरसाती फसल का उत्पादन मिलता था। किसान गिरधारी राम ने हलधर टाइम्स को बताया कि कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। सूरत संभाली तो परिवार की रहगुजर चलाने के लिए मजदूर बन गया। क्योंकि, जमीन बारानी थी। मजदूरी के अलावा रहगुजर चलाने का कोई दूसरा विकल्प नहीं था। करीब 4 दशक तक मजदूर के रूप में काम किया। लेकिन, मजदूरी भी कहां तक? क्योंकि, उम्र की भी एक सीमा है। उन्होंने बताया कि मजदूरी से जब मन भरने लगा, इसी बीच मेरी मुलाकात कृषि विज्ञान केन्द्र, गुड़ामालानी के कृषि वैज्ञानिकों से हुई। उनके मार्गदर्शन में जमा पंूजी से ट्यूबवैल खुदवाया। साथ ही, बेर और गूंदा के पौधें लगाएं। इनसे उत्पादन मिलने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। वहीं, परम्परागत फसलों से भी लाभ मिलने लगा है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार, गेहूं का उत्पादन लेता हॅू। गौरतलब है कि किसान गिरधारी के पास 8 बीघा जमीन है। उन्होने बताया कि इन फसलों के उत्पादन से सालाना लाख से सवा लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

बेर से तीन लाख

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में 125 पौधें बेर के लगाए है। यह 7 साल के हो चुके है। बेहत्तर देखरेख के चलते फल का अच्छा उत्पादन मिल रहा है। बगीचे से सालाना तीन लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। इसके अलावा 8-10 हजार रूपए की आमदनी दर्जन भर लसोड़ा के पौधों से मिल जाती है।  

लाभकारी पशुपालन

पशुधन में मेरे पास 4 भैंस, 6 गाय और दो दर्जन के करीब बकरियां है। इनसे प्रतिदिन 25-30 किलो दुग्ध का उत्पादन मिलता है। इसमें से एक समय का दुग्ध डेयरी को बिक्री कर देता हॅू। इससे मासिक 10-12 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है। वहीं, बकरीपालन से सालाना 50-60 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके खेतों में उपयोग में ले रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. प्रदीप पगारिया, मनप्रीत सिंह, अनिल कुमार, वेला राम,कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर


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