बाजरा की फसल में रोग-कीट का खतरा, ऐसे करें बचाव
(सभी तस्वीरें- हलधर)मुख्य विवरण: बाजरा राजस्थान की प्रमुख खाद्यान्न फसल है। वर्तमान में बाजरा की फसल में तुलासिता रोग, ब्लास्ट रोग और सफेद लट, प्ररोह मक्खी, तना छेदक कीट आदि के होने की संभावना हैं। बाजरा की फसल को इन कीटों व रोगों से बचाने के लिए विभागीय सिफारिशों के अनुसार छिड़काव और भुरकाव करें। छिड़काव करते समय किसान हाथों में दस्ताने, चश्मा, मुंह पर मास्क और पूरे वस्त्र पहने और इस बात का विशेष ध्यान रखें कि छिड़काव मौसम साफ होने के उपरान्त ही करें।
रोग
तुलासिता रोग: रोग के प्रकोप से पत्तियां चितकबरी पीली पड़ जाती हैं और ऐसी पत्तियों की निचली सतह पर सफेद धूसर कवक वृद्धि दिखाई देती हैं। रोग की अग्रिम अवस्था में रोगी पौधों पर सिट्टे पत्तीनुमा गुच्छों में बदल जाते हैं। इससे बचाव के लिए जिन खेतों में रोग का प्रकोप दिखाई देवें, वहां बुवाई के 21 दिन बाद मैंकोजेब 2 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें अथवा मेटालेक्जिल 8 प्रतिशत+ मैंकोजेब 64 प्रतिशत कवकनाशी का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
ब्लास्ट अथवा प्रध्वंस रोग: इस रोग कारण पत्तियों पर भूरे रंग की परिधि से घिरे हुए अण्डाकार धब्बे बनते हैं। इन धब्बों का केन्द्र धूसर रंग का होता हैं। इस रोग का उग्र प्रकोप होने पर पत्तियां पीली पड़कर झुलस जाती हैं। इसके नियंत्रण के लिए आधा मिली प्रोपीकोनाजोल 25 ईसी. अथवा ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25 प्रतिशत + टेबुकोनाजोल 50 प्रतिशत (75 डब्ल्यू.जी.) आधा ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर का छिड़काव करें। उपरोक्त छिड़काव को 15 दिन बाद पुनः दोहरावें।
कीट
सफेद लट: सफेद लट कीट जमीन में पौधों की जड़ों को काटकर पौधे को सूखा देते हैं। सूखे पौधों की जड़ों के आस-पास मिट्टी हटाने पर यह लट दिखाई देती हैं। खड़ी फसल में सफेद लट के नियंत्रण के लिए बुवाई के 21 दिन पश्चात इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का 500 मिली को लगभग 80 से 100 किलोग्राम सूखी मिट्टी में मिलाकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में पौधों की जड़ों के आस-पास डाल देवें। इसके बाद हल्की सिंचाई करें।
तना मक्खी: इसके प्रकोप से शीर्ष पत्तियां सूख जाती हैं और तने को शीर्ष से चिरने पर लार्वा दिखाई देता हैं। इसके नियंत्रण के लिए ड्रिक्टप्रोनिल 40 प्रतिशत + इमिडाक्लोप्रिड 40 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. का 5 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के हिसाब से बीज अंकुरण के 35 दिन बाद प्रयोग करें अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल. का आधा मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर प्रयोग करें।
फड़का: फड़का कीट पत्तियों को काटकर नुकसान पहुंचाता हैं। इस कीट का प्रकोप होने पर नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें अथवा प्रोफेनॉफॉस 50 ईसी. 1.25 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
लेखक/सौजन्य: डॉ. जितेन्द्र शर्मा, अर्चना कुमारी मीणा, एग्री क्लिनिक, टोंक