जुलाई में मक्का, बाजरा और दलहन की खेती का गोल्डन फॉर्मूला

नई दिल्ली 14-Jul-2026 01:36 PM

जुलाई में मक्का, बाजरा और दलहन की खेती का गोल्डन फॉर्मूला

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जुलाई का महीना खरीफ फसलों की खेती का सबसे सुनहरा समय माना जाता है। यही वह दौर है जब किसान सही तकनीक, उन्नत बीज, संतुलित खाद प्रबंधन और समय पर खरपतवार नियंत्रण अपनाकर मक्का, बाजरा, मूंग और उड़द जैसी फसलों से रिकॉर्ड उत्पादन और बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस महीने लिया गया हर सही फैसला पूरे सीजन की सफलता तय करता है। देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में खरीफ फसलों का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए मानसून की शुरुआत के साथ खेत की तैयारी, समय पर बुआई और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

जुलाई में मक्का की खेती: सही शुरुआत, ज्यादा उत्पादन

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां मानसून आने से 10-15 दिन पहले मक्का की बुआई कर देनी चाहिए। वहीं वर्षा आधारित क्षेत्रों में पहली अच्छी बारिश के बाद ही बुआई करना सबसे बेहतर रहता है।जिन क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या रहती है, वहां मेड़ों पर बुआई करें, जबकि कम वर्षा वाले इलाकों में कूंड़ (गहरी खाइयों) में बुआई अधिक लाभदायक होती है। बेहतर अंकुरण के लिए बीजों को रातभर पानी में भिगोकर सुबह छाया में सुखाने के बाद बुआई करें।

बाजरे की बुआई: देरी हो तो अपनाएं रोपाई तकनीक
बाजरे की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। अच्छी जल निकासी वाले खेतों में यह फसल बेहतर उत्पादन देती है।
सीधी बुआई का सबसे उपयुक्त समय 15 से 30 जुलाई माना जाता है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 4-5 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है।
यदि किसी कारणवश समय पर सीधी बुआई नहीं हो पाए, तो खेती छोड़ने या देर से बुआई करने के बजाय पौध तैयार कर रोपाई करना अधिक लाभदायक रहता है।

इसके लिए जुलाई की शुरुआत में 500-600 वर्गमीटर क्षेत्र में 2 से 2.5 किलोग्राम बीज बोकर 2-3 सप्ताह में स्वस्थ पौध तैयार की जा सकती है।

बाजरे की रोपाई का वैज्ञानिक तरीका

रोपाई करते समय खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है, ताकि पौधों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे।

  • लाइन से लाइन की दूरी – 45-50 सेंटीमीटर
  • पौधे से पौधे की दूरी – 10-15 सेंटीमीटर

एक स्थान पर केवल एक पौधा लगाएं।

इस तकनीक से पौधों का विकास बेहतर होता है, पोषक तत्वों की प्रतिस्पर्धा कम होती है और उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।

मूंग और उड़द: सही खेत का चुनाव ही सफलता की कुंजी

खरीफ मौसम में मूंग और उड़द की खेती के लिए हमेशा ऊंचे या समतल तथा अच्छे जल निकास वाले खेत चुनें, ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी आसानी से निकल सके।
उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में इन फसलों की खेती मटियार दोमट से लेकर रेतीली दोमट मिट्टी में सफलतापूर्वक की जा सकती है। मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

बुआई का सही समय

  • मूंग – जुलाई मध्य से अगस्त के दूसरे सप्ताह तक
  • उड़द – जुलाई के पहले पखवाड़े के भीतर

खाद प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण से बढ़ेगा मुनाफा

खाद का प्रयोग हमेशा मिट्टी जांच रिपोर्ट के आधार पर करें।

मक्का और बाजरा में फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुआई के समय लाइनों में 3-4 सेंटीमीटर गहराई पर दें। बची हुई आधी नाइट्रोजन 4-5 सप्ताह बाद खड़ी फसल में डालें।

खरपतवार नियंत्रण के लिए

  • पहली निराई – 15 दिन बाद
  • दूसरी निराई – 35-40 दिन बाद

साथ ही बुआई के दो दिन के भीतर अनुशंसित खरपतवारनाशी जैसे एट्राजीन या स्टाम्प 30 ईसी का वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रयोग करने से शुरुआती खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

समय पर सही तकनीक, खेती में दोगुना फायदा

यदि किसान जुलाई में मौसम के अनुसार वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज, संतुलित पोषण, समय पर बुआई और खरपतवार नियंत्रण अपनाते हैं, तो मक्का, बाजरा, मूंग और उड़द जैसी खरीफ फसलों से न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि लागत घटाकर बेहतर मुनाफा भी कमाया जा सकता है।


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