प्री-मानसून बारिश से राजस्थान में खरीफ बुवाई पहुंची 32 लाख हेक्टेयर
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश के कई जिलों में प्री-मानसून की अच्छी बरसात से किसानों के चेहरे खिल उठे है। किसानों ने अच्छी बरसात का फायदा उठाते मूंगफली के बाद उड़द, ग्वार, मूंग की बुवाई शुरू कर दी है। उधर, हाड़ौती संभाग में भी धान की नर्सरियां खेतोंं में हरियाली बिखरने लगी है। गौरतलब है प्रदेश में अब तक मानसून ने दस्तक नहीं दी है। इसके चलते किसान अगेती फसल बुवाई पर जोर दे रहें है। ताकि, मानसूनी बारिश से फसल पककर तैयार हो जाएं। बताया जा रहा है कि इस वर्ष अलनीनो के प्रभाव से बारिश कम होने की संभावना है इससे किसान और परेशान हैं। अलनीनो के चलते कई क्षेत्रों में मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है, हालांकि किसानों को उम्मीद है कि अच्छी बारिश होगी। किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। खेतों में नमी की कमी के कारण कृषि विभाग भी किसानों को बिना पर्याप्त बारिश और नमी के जल्दबाजी में बीज न बोने की सलाह दे रहा। देखा जाए तो इस बार प्री मानसून के दौरान भी बारिश पिछले वर्ष की अपेक्षा 60 से 70 प्रतिशत कम ही हुई है। हालांकि, पिछले दिनों राजधानी जयपुर सहित उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और हाड़ौती क्षेत्र में हुई प्री-मानसून बारिश ने किसानों को राहत दी है।
यह करें किसान
सभी की नजर आसमान पर
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगर परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो मानसून राजस्थान में जुलाई में ही प्रवेश करेगा। मानसून की देरी से किसानों की निगाहें मौसम पर है। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त बारिश का इंतजार हो रहा है।
बीजोपचार के बाद ही बाजरा बुवाई
बाजरा की बुवाई करने वाले किसानों को फसल बुवाई में सावधानी बरतने की जरूरत है। किसान बीजोपचार के बाद ही फसलों की बुवाई करें। फसल को गून्दियाँ अथवा अरगट रोग से बचाने के लिए 5 लीटर पानी में एक किग्रा नमक घोलकर बीज को पांच मिनट डूबोकर हिलायें, तैरते हुए हल्के बीज और कचरे को निकाल कर जला दें। शेष बीज को साफ पानी से धोकर छाया में सुखायें। बीज को 3 ग्राम थायरम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करें। दीमक नियंत्रण के लिए 10 मिली इमिडाक्लोप्रिड 600 एफएस से प्रति किलो बीज को उपचारित करें। वहीं, क्षारीय और लवण भूमि के लिए बुवाई पूर्व बीज को एक प्रतिशत सोडियम सल्फेट में 12 घंटे भिगोकर साफ पानी से धोकर और सुखाने के बाद बीज को कवकनाशी से उपचारित करके बुवाई करें।
जिप्सम का करें उपयोग
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेत की आखिरी तैयारी के समय 2.5 क्विंटल प्रति हैक्टयर की दर से जिप्सम का उपयोग करना लाभकारी होता है। वहीं, सफेद लट और दीमक नियंत्रण के लिए क्यूनालफोस 25 ईसी अथवा क्लोरोपायरीफोस 20 ईसी एक लीटर प्रति बीघा बिजाई के साथ देनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिक हरिश रछोया ने बताया कि मूंगफली की अच्छी फसल के लिये 5 टन अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद प्रति हैक्टर की दर से खेत की तैयारी के समय मिट्टी में मिला देनी चाहिए। उर्वरक के रूप में 20:32:20 कि.ग्रा./है. नत्रजन, फॉस्फोरस और पोटाश का प्रयोग आधार खाद के रूप में करना चाहिए। मूंगफली में गंधक का विशेष महत्व है। अत: गंधक पूर्ति का सस्ता स्त्रोत जिप्सम है। जिप्सम की 250 कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टयर की दर से प्रयोग, बुवाई से पूर्व आखरी तैयारी के समय प्रयोग करना चाहिए। मूंगफली की गुच्छेदार प्रजातियों का 80 किग्रा और फैलने और अद्र्ध फैलने वाली प्रजातियों का 60 किग्रा बीज (दाने) प्रति हैक्टयर प्रयोग उत्तम पाया गया है।
32 लाख हैक्टयर में बुवाई
प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में खरीफ फसलों की बुवाई 32.77 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि बारिश शुरू होने से अब खरीफ फसलो की बुवाई में तेजी से बढौत्तरी होने का अनुमान है।
फसल बुवाई एक नजर
(बुवाई क्षेत्र हैक्टयर में)