तकनीक आधारित नवाचार करके किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकते है। यकीन नहीं है तो किसान लालचंद अजमेरा का उदाहरण सामने है। छोटी जोत को देखते हुए किसान लालचंद ने मैदानी सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। मुनाफा अच्छा मिला तो जमीन लीज पर लेकर सब्जी उपजाने लगे। उनका कहना है कि छोटी जोत में सब्जी उत्पादन ही किसान के लिए लाभ का सौंदा है। अन्यथा, भूखे मरने की स्थिति आ जाएं। गौरतलब है कि किसान लालचंद सब्जी उत्पाीदन से प्रति बीघा 20-25 हजार रूपए की बचत ले रहे है। मोबाइल 95876-53197
आरामपुरा, कोटा। किसान लालचंद अजमेरा के गांव का नाम भले ही आरामपुरा हो। लेकिन, किसान के जीवन में आराम कहां? मुश्किल तब और बढ़ जाती है जब जोत छोटी हो। लेकिन, हौसलें का नाम ही जीवन है। प्रयास करने पर बंद किस्मत का ताला भी खुलता है। कुछ ऐसे ही अनुभवों से दो चार है किसान लालचंद। जो 11 बीघा क्षेत्र में सब्जी फसल का उत्पादन करके प्रति बीघा 20-25 हजार रूपए का औसत मुनाफा कमा रहे है। किसान लालचंद ने हलधर टाइम्स को बताया कि 8वीं पास करने के साथ ही पढ़ाई छोड़ दी। परिजनों के साथ खेती का काम संभालने लगा। उन्होने बताया कि जहां तक परिजन खेती संभालते रहे, लाभ-हानि का गणित समझ नहीं आया। लेकिन, जब जिम्मेदारी मेरे कंधो पर आई तो लाभ के लिए सब्जी उत्पादन से जुड़ गया। गौरतलब है कि किसान लालचंद के पास महज 4 बीघा जमीन है। शेष जमीन लीज पर ली हुई है। उन्होने बताया कि छोटी जोत में परम्परागत फसलो का उत्पादन लिया जाएं तो भूखे मरने की स्थिति आ जाएं। क्योंकि, इन फसलो से सब्जी से आधा भी नहीं मिलता। ऐसे में लागत निकाले या परिवार का खर्च। इसलिए मेरे जैसे किसानों के लिए सब्जी उत्पादन करना ही उचित है।
ड्रिप मल्च से बढ़ी गुणवत्ता
उन्होंने बताया कि सब्जी उत्पादन से जुडऩे के बाद बूंद-बूंद सिंचाई का महत्व समझ में आया। क्यारी की तुलना में ड्रिप सिंचाई में काफी कम पानी लगता है। उत्पाद की गुणवत्ता भी काफी अच्छी रहती है। पैतृक के साथ-साथ लीज की जमीन पर भी ड्रिप सिंचाई का ही उपयोग कर रहा हॅू। साथ ही, प्लास्टिक मल्च का। इनके उपयोग से फल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है।

इन फसलो का उत्पादन
उन्होने बताया कि सब्जी फसलों में करेला, धनिया, फूल-पत्तागोभी, मिर्च-टमाटर, प्याज-लहसुन, लौकी तुरई आदि फसलो का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों के उत्पादन से औसत 20-25 हजार रूपए प्रति बीघा की बचत मिल जाती है। उत्पादन और बाजार भाव तेज रहने की स्थिति में थोड़ा मुनाफा और बढ़ जाता है।
पशुपालन से लाभ
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2गाय है। प्रतिदिन 5-7 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार कर खेतों में उपयोग कर रहा हॅू।
स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक उद्यान, कोटा