दशक तक मंड़ी में हम्माली, अब खेती से 8 लाख
नई दिल्ली 16-Oct-2025 11:57 AM

दशक तक मंड़ी में हम्माली, अब खेती से 8 लाख
(सभी तस्वीरें- हलधर)

चूनाराम जाट  रेतीले धोरे किसानों के लिये अब वरदान बन चुके है। पानी की कमी के चलते पहले जिन खेतों से 50-60 हजार रूपए की आय मिला करती थी। अब यह आंकड़ा 1-2 गुना नही, 10 गुना बढ़त लेता नजर आ रहा है। कुछ ऐसे ही अनुभव है किसान चुनाराम सारण के। जो परम्परागत फसल और बकरीपालन के जरिए इस मुकाम तक पहुंचे है। जबकि, पहले किसान चूनाराम गुजरात की कृषि उपज मंडियों में हम्माल का काम करके परिवार का रहगुजर चलाते थे। लेकिन अब उन्नत तकनीक से खेती करके सालाना 7-8 लाख रूपए की आय घर बैठे ले रहे है। मोबाइल 76654-94065
 

यानी थार अब सोना उगल रहा है। कृषि मंड़ी मजदूर के सालाना 8 लाख की बचत की यह कहानी है किसान चुनाराम सारण की। जिन्होने दशक से ज्यादा समय के तक परिवार की रहगुजर के लिए गुजरात की कई मंडियों में हम्माल का काम किया। लेकिन, अब उन्नत तकनीक से खेती करके बेहत्तर जीवन जी रहे है। किसान चुनाराम ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 8 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि पहले जमीन बारानी होने से परिवार के गुजारे लायक आमदनी नहीं होती थी। इसके चलते होश संभालने के साथ ही गुजरात चला गया। वहां, कई कृषि उपज मंडियों में हम्माली का काम किया। करीब दशक से ज्यादा समय तक यह काम करने के बाद गांव लौट आया। इसके बाद जमा पंूजी से ट्यूबवैल खुदवाया। साथ ही, वैज्ञानिक प्रशिक्षण के बाद खेती के तौर-तरीकों में बदलाव करना शुरू किया। इससे ना केवल फसल उत्पादन बढाने में मदद मिली। बल्कि, आमदनी का आंकड़ा भी काफी बढ़ गया। इससे अब दिहाड़ी की फ्रिक नहीं रही है। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में बाजरा, अरंड़ी और जीरा फसल का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलो से सालाना 7-8 लाख रूपए कीआमदनी मिल जाती है।
बकरी भी लाभकारी
उन्होंने बताया कि खेत सुधार के साथ-साथ बकरी पालन भी शुरू किया। इससे भी अतिरिक्त आमदनी होने लगी। वर्तमान में मेरे पास एक दर्जन के करीब बकरियां है। इनसे सालाना 50-60 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।
पशुधन में यह
पशुधन में गायडराम के पास 4 गाय है। इनसे प्रतिदिन 8-10  लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। दुग्ध का उपयोग घर में हो जाता है। वहीं, शेष रहने वाले दुग्ध की गांव में ही बिक्री हो जाती है। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद और जैव कीटनाशक तैयार करके खेतों के काम लेता हॅू।
स्टोरी इनपुट: डॉ. रावताराम भाखर, डॉ. रघुवीर कुमार, डॉ. अनिता कुमारी, पशुपालन विभाग, बाड़मेर


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