चूरू भूमि विकास बैंक में करोड़ों का ऋण घोटाला, अपात्रों को बांटे गए कर्ज
चूरू भूमि विकास बैंक में करोड़ों का ऋण घोटाला, अपात्रों को बांटे गए कर्ज
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। दशक के भीतर चूरू प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक ने आंख मूंद कर करोड़ो रूपए का ऋण अपात्रो का बांट दिया। विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। परिणाम रहा कि 5 फीसदी ब्याज अनुदान योजना के तहत बांटे गए कुल ऋणों में से अवधिपार मामलों की वसूली मात्र 1.46 प्रतिशत पर सिमट गई। वहीं, जून 2025 तक बैंक 25.30 करोड़ का ऋण डूब चुका था। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार स्तर से अनुमोदित अद्यतन ऋ ण नीति जारी होने के उपरान्त, ऋणी का सिविल स्कोर भी पत्रावली में संलग्न किया जाना चाहिए था, परन्तु बैंक स्तर पर किसी भी पत्रावली में संबंधित ऋणी की सिविल रिपोर्ट संलग्न नहीं पाई गई। ऋणी द्वारा प्रथम और द्वितीय किश्त लेने के उपरान्त आगामी किश्त देने से पूर्व बैंक द्वारा मौकें की जांच कर इन किश्तों का उपयोगिता प्रमाण पत्र पत्रावलियों में संलग्न किया जाना चाहिए था, परन्तु अधिकांश पत्रावलियों में किश्तवार ऋण उपयोगिता प्रमाण पत्र संलग्न नहीं किये गये। अधिकांश ऋ ण पत्रावलियों में तारबंदी, यंत्रीकरण आदि के खरीद के बिल संलग्न नहीं है। ऋण वितरण की प्रक्रिया एक समान नहीं रही। कुछ पत्रावलियों में ऋण एकमुश्त जारी कर दिया गया है तो कुछ पत्रावलियों में ऋण अधिक किश्तों में दिया गया है।
5 लाख पत्रावलियों में गंभीर खामियां
निरीक्षण रिपोर्ट में चूरू प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक की तीनों शाखा चुरू, राजगढ़ और सुजानगढ़ के स्तर पर संधारित ऋण आवेदन रजिस्टर अपूर्ण पाए गए। रजिस्टर में अनेक प्रकरणों में ऋण स्वीकृति की दिनांक और राशि अंकित नहीं है। ऋण वितरण का किश्तवार और दिनांकवार विवरण नहीं लिखा गया। राज्य बैंक से प्राप्त पुनर्भरण या पत्रावली निरस्त होने आदि का विवरण भी नहीं लिखा गया। निरीक्षण के दौरान ऋण स्वीकृति नोटशीट के अवलोकन में पाया गया कि बैंक की शाखा सचिव और एलवीओ. का पदभार तीनों शाखाओं के स्तर पर पृथक-पृथक एक ही कार्मिक के पास रहा।
25.30 करोड़ का ऋ ण अवधिपार
प्राथमिक बैंक की सहकारी वर्ष 2024-25 में 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजनान्तर्गत वितरित ऋणों में से अवधिपार हो चुके ऋण की वसूली मात्र 1.46 प्रतिशत रही। अवधिपार और नियमित ऋणों की वसूली 18.58 प्रतिशत रही। 30 जून 2025 को इन ऋणों में 25 करोड़ 30 लाख 28 हजार रुपए का ऋण अवधिपार रहा है।
जांच रिपोर्ट यह दोषी
बैंक स्तर पर निरीक्षण के दौरान पाई गई उक्त अनियमितताओं और कमियों के लिए तत्कालीन शाखा सचिव, एलवीओ, सचिव और ऋण उपसमिति के सदस्यों को दोषी बताया गया है। इनमें भारत भूषण शर्मा,राजकुमार गुप्ता, महिपाल सिंह राजावत , नरेन्द्र सिंह सीगड़ा और सुनिल कुमार मांडिया को दोषी माना गया है। जबकि, बैंक अध्यक्ष ईश्वर राम डुडी, सदस्य फुलाराम , ज्ञानाराम और श्रवण कुमार शामिल हैं। इन्हें इन्हें भी गलत ऋ ण स्वीकृत करने के लिए दोषी माना गया है।