10 बकरियों से शुरू किया कारोबार, आज सालाना ढाई लाख कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)
बायटू, बाड़मेर। किस्मत जब मेहरबान होती है तो सूखे में भी चार चांद जैसा अहसास देने लगती है। ऐसा ही अनुभव बकरीपालक बालाराम चौधरी ने किया है। बालाराम ने साल भर में बकरीपालन से ढाई लाख रुपए की आमदनी प्राप्त की है। शायद इसी कारण से बकरी को गरीब का एटीएम कहा गया है। किसान बालाराम बकरी के अलावा बेर और खेजड़ी की बागवानी से भी आय प्राप्त कर रहा है। किसान बालाराम ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 82 बीघा जमीन है। देखने-सुनने में जमीन का रकबा काफी बड़ा लगता है। लेकिन, फसलों का उत्पादन अब भी राम भरोसे है। जिस साल अच्छी बरसात हो जाती है तो जमीन उम्मीद से ज्यादा देती है। बरसात नहीं होने पर अकाल से भी दोचार होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अकाल से होने वाली आर्थिक हानि को रोकने के लिए थार में बकरीपालन से अच्छा कोई व्यवसाय नहीं हो सकता है। क्योंकि, बकरियों के रहने की यहाँ प्राकृतिक व्यवस्था है। इसलिए, पालन का खर्च काफी कम आता है। गौरतलब है कि किसान बालाराम आठवीं पास करने के बाद से ही खेती कर रहा है। उन्होंने बताया कि पहले तो मैं परंपरागत तौर-तरीकों से फसलों का उत्पादन लेता था। लेकिन, अब वैज्ञानिक मार्गदर्शन में वर्षा आधारित फसलों का उत्पादन ले रहा हूँ। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में कृषि विज्ञान केन्द्र, स्कोर से जुड़ने का मौका मिला। वहीं से फसल उत्पादन और बकरीपालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद फसल उत्पादन में काफी सुधार देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि बारानी जमीन के चलते एक ही साथ सभी फसलों की बुवाई कर देता था। इस कारण उपज कम मिलती थी। जब से एकल फसल का उत्पादन लेना शुरू किया है, उपज काफी बढ़ चुकी है। परंपरागत फसलों में मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार और तिल का उत्पादन लेता हूँ। इन फसलों में बारिश होने से ढाई से तीन लाख रुपए की आमदनी मिल जाती है।
बकरी एटीएम ऐसे
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में 10 बकरी के सहारे बकरीपालन का कार्य शुरू किया। वर्तमान में बकरियों की संख्या 30 तक पहुंच चुकी है। जबकि, सकल बकरियों की संख्या 50 है। उन्होंने बताया कि पहले देशी बकरियां रखता था। लेकिन, अब सिरोही नस्ल की बकरियों का पालन कर रहा हूँ। इससे आय भी अच्छी होने लगी है। पिछले साल बकरियों से ढाई लाख रुपए की आय मिली है। बकरियों के अलावा एक सिरोही नस्ल का बोका (बकरा) भी मेरे पास है। उत्पादित दूध से घी तैयार करके 700 रुपए प्रति किलो की दर से बिक्री कर रहा हूँ। 7 माह के दौरान ही साढ़े 52 हजार रुपए की आय घी बिक्री से हुई है।
बेर-खेजड़ी से आय
उन्होंने बताया कि बेर के 10 पौधे मेरे पास हैं। इससे थोड़ी बहुत आय मिल जाती है। लेकिन, कलम विधि से बेर के 100 पौधे तैयार करके खेत में लगाए हैं। वहीं, खेजड़ी के 250 पौधे लगे हुए हैं। खेजड़ी के पौधों से प्राप्त होने वाली लूम बकरियों के आहार में काम आ जाती है। वहीं, सांगरी को सुखाकर बिक्री कर देता हूँ। 10-15 किलो सांगरी की बिक्री से 10 हजार रुपए की आय मिल जाती है।