नौकरी छोड़ समेकित खेती पर मेहनत की, अब कमाई पहुंची 15 लाख के पार

नई दिल्ली 24-Mar-2026 12:34 PM

नौकरी छोड़ समेकित खेती पर मेहनत की, अब कमाई पहुंची 15 लाख के पार

(सभी तस्वीरें- हलधर)

भूलाहेड़ा, कोटा। इनोवेटिव सोच जब आधुनिक तकनीक के साथ जमी लेती है तो आय का मंजर जरूर बदलता है। दशक से कम समय में अपनी आय को 15 लाख तक पहुंचाने वाले किसान है मुश्ताक चौधरी। जो पहले एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे। लेकिन, अब समेकित कृषि के मामले में दूसरे किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुके है। इनके खेतो में ना केवल बागवानी, बल्कि, पशुपालन, मुर्गीपालन, बकरीपालन और तकनीक आधारित उन्नत खेती की झलक देखने को मिलती है। किसान मुश्ताक ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 5 हैक्टयर जमीन है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के चलते दो अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर की उपाधि ली। इसके बाद एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करने लगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में कुछ कारणों के चलते नौकरी छोडक़र खेती से जुड़ गया। शुरूआत में परम्परात फसलो के उत्पादन तक सीमित रहा। इस दौरान खेतों से होने वाली आय और बढ़ते खर्च को पास से जानने का मौका मिला। यही से कृषिगत आय बढाने का लक्ष्य किया। परिणाम रहा है कि अब खेत में समेकित कृषि की कहानी कह रहे है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास ट्यूबवैल है और परम्परागत फसलो में सरसों, चना, गेहूं, धान और सोयाबीन का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 3 से 4 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

नांरगी-अमरूद ने बदला मंजर

उन्होंने बताया कि आय बढौत्तरी के लिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से मुलाकात हुई। उनके मार्गदर्शन में दशक पूर्व 14 बीघा जमीन में नारंगी का बगीचा स्थापित किया। वहीं, एक साल बाद 700 पौधें अमरूद के लगाएं। उन्होंने बताया कि अमरूद और नारंगी की फसल से ही आय का मंजर बदलने में मदद मिली है। इन फसलो से सलाना 8 लाख रूपए का श्राद्ध लाभ मिल जाता है।

नई फसलों पर ट्रायल

उन्होंने बताया कि धनिया, लहसुन की फसल से तो शुरू से ले रहा हॅू। लहसुन की फसल से औसत 15-20 हजार रूपए का लाभ मिल जाता है। जबकि, इस साल एक-एक बीघा क्षेत्र में चिया और कलौंजी की फसल लगाई है। इन दोनों फसलों में जिससे ज्यादा आमदनी मिलेगी, वह मेरे फसल चक्र में शािमल हो जायेगी। 

उन्नत पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय, 4 भैंस और बछड़े-बछड़ी है। प्रतिदिन 10-15 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। दुग्ध का विपणन नहीं करता हॅू। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग करता हॅू। इसके अलावा दो दर्जन के करीब मुर्गियां, आधा दर्जन बकरियां और छोटे से पौंड में मछली पालन किया हुआ है। इससे भी थोड़ी बहुत आमदनी मिल जाती है। 

स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक उद्यान, कोटा


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