टमाटर-तरबूज की खेती किसान को कर रही मालामाल, कमाई 5 लाख पार
(सभी तस्वीरें- हलधर)
गोपालपुरा, बारां। जिस किसान ने परम्परागत खेती की लीक से हटकर जो भी कुछ किया है, उस किसान की किस्मत संवर गई है। यकीन नहीं है तो किसान नेमीचंद जाट इसका उदाहरण। नेमीचंद ने सब्जी फसलों के उत्पादन से आमदनी बढ़ाना शुरू किया है। हालांकि, सब्जी खेती का ज्यादा अनुभव नहीं होने के कारण इनको आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। लेकिन, उत्पादन लेना नहीं छोड़ा। इसके चलते मुनाफे का आंकड़ा अब बढऩे लगा है। किसान नेमीचंद ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 12 बीघा जमीन है। जमीन का रकबा कम होने से 60 बीघा जमीन लीज पर लेकर खेती करता हॅू। पहले परम्परागत फसलों का उत्पादन लेता था। लेकिन, पिछले तीन-चार साल से जायद फसलों का उत्पादन शुरू किया है। इससे एक साल तो जानकारी के अभाव में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन, कहते है कि ठोकर खाने से ही चलना सीखते है। ऐसे ही अनुभव से दो-चार होकर हौसलें के साथ आगे बढ़ रहा हॅू। बूंद-बूंद सिंचाई और प्लास्टिक मल्च से होने वाला फायदा सब्जी फसलों के उत्पादन से जुडऩे के बाद ही पता चला है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में पानी की कमी नहीं है। लेकिन, उद्यानिकी विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रेरित होकर मैने राष्ट्रीय बागवानी मिशन और पीएम कृषि सिंचाई योजना का लाभ लेकर बूंद-बूंद सिंचाई को अपनाया है। इससे खेतों में श्रम ओर समय के साथ पानी की बचत देखने को मिल रही है। परम्परागत फसलों में धान, सोयाबीन, गेहूं, सरसों, चना की खेती करता हॅू। इन फसलों से खर्च निकालकर 4-5 लाख रूपए की बचत मिल जाती है।
सब्जी से तीन लाख
उन्होंने बताया कि जायद सब्जी फसलों से जुडऩे के बाद एक साल तो लाख रूपए से ज्यादा घाटा उठाना पड़ा। लेकिन, हौंसला नहीं हारा। सब्जी फसलों में टमाटर, तरबूज और करेले का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से खर्च निकालने के बाद ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिल रही है।
उन्नत पशुपालन
पशुधन में मेरे पास 5 भैंस और दो गाय है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। एक समय का दुग्ध दूधियों को 35-40 रूपए प्रति लीटर की दर से विपणन कर देता हॅू। वहीं, पशु अपशिष्ट का उपयोग कम्पोस्ट खाद के रूप में खेतों में हो जाता है।
स्टोरी इनपुट: नंदबिहारी मालव,उपनिदेशक, उद्यान, बारां