गोबर ने बनाया लखपति, सलाना कमाई 10 लाख से पार

नई दिल्ली 05-May-2026 12:36 PM

गोबर ने बनाया लखपति, सलाना कमाई 10 लाख से पार

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मेघाखेड़ा, राजसमंद। गोबर भी अपने में जादू रखता है। ये खेत-आंगन को तो स्वस्थ बनाता ही है। वहीं, किसान को लखपति भी बना देता है। यानी गोबर से किसान चौतरफा लाभ कमा सकता है। जैसा किसान सोहन अहीर ने किया। उनका कहना है कि ठेकेदारी का काम छोडक़र वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन लेना श्ुारू किया। इससे पशुधन की संख्या भी समय के साथ बढ़ती गई और माटी स्वस्थ होने के साथ-साथ उपज का भी बेहत्तर लाभ मिलना शुरू हो गया। साथ ही, उर्वरक और कीटनाशक पर होने वाला खर्च शून्य हो गया। गौरतलब है कि केवल वर्मी खाद उत्पादन से ही किसान सोहन को सालाना 6 लाख रूपए की आय मिल रही है। जबकि, सकल आमदनी का आंकड़ा 10 लाख रूपए के करीब है। किसान सोहन ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 23 बीघा जमीन है। उन्होने बताया कि 9वीं पास करने के साथ ही पढ़ाई छोड़ दी। सूरत संभालने पर रोजी-रोटी के लिए ठेकेदारी का काम करने लगा। कई साल तक यह काम किया। लेकिन, आखिर में गोबर का जादू चल गया और जैविक इनपुट आदान उत्पादनकर्ता के साथ-साथ जैविक किसान बन गया। उन्होंने बताया कि गोबर से ना केवल अपने ठेकेदारी के काम से दोगुना कमा रहा हॅू। साथ ही, जैविक खाने के साथ-साथ लोगों को भी जैविक खिला रहा हॅू। उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट की 40 बेड़ मेरे पास है। मासिक दो से तीन टन खाद का उत्पादन मिल रहा है। इससे सालाना ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। वहीं, इतनी ही आमदनी कें चुओं की बिक्री से हो रही है। गौरतलब है कि किसान सोहन ने दो तीन लोगों को वर्षभर का रोजगार भी उपलब्ध कराया है।

12 बीघा जमीन जैविक

उन्होंने बताया कि वर्मी खाद उत्पादन के बार करीब 12 बीघा जमीन पूरी तरह से जैविक बन चुकी है। खेत में केवल वर्मी खाद देता हॅू। इससे उर्वरक और कीटनाशी पर होने वाला खर्च शून्य हो चुका है। परम्परागत फसलों में गेहूं, मक्का, मूंगफली का उत्पादन लेता हॅू। उन्होंने बतााय कि गेहूं की बिक्री 30 रूपए प्रति किलो के भाव से कर रहा हॅू। सिंचाई के लिए मेरे पास कुअंा है। खर्च निकालने के बाद इन फसलों से 3 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।

पशुपालन से भी आय

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 5 गाय और 13 भैंस है। प्रतिदिन 35-38 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। दुग्ध का विपणन डेयरी को कर रहा हूॅ। वहीं, पशु अपशिष्ट का उपयोग वर्मी खाद बनाने में हो जाता है। उन्होंने बताया कि पशुपालन से मासिक 20 हजार रूपए का शुद्ध लाभ मिल रहा है।

स्टोरी इनपुट: डॉ. पीसी रैगर, केवीके, राजसमंद


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