खजूर से कमा रहे हैं 5 लाख प्रति बीघा

नई दिल्ली 21-Apr-2026 01:09 PM

खजूर से कमा रहे हैं 5 लाख प्रति बीघा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पेमासर, बीकानेर। सूखी जमीन को मेहनत और हौंसले से गुलजार करने की यह कहानी है किसान शिवकरण कूकणा की। जो प्रति बीघा 4 से 5 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। सोच रहे होंगे, बीघा से इतनी आय कैसे संभव है तो बताते चले कि किसान शिवकरण खजूर की खेती कर रहे है। साथ ही, खजूर का प्रसंस्करण और मूल्यसंवद्र्धन करके अपनी आय बढाने के प्रयास में जुटे है। उनका कहना है कि परम्परागत फसलों से 20-25 हजार रूपए बीघा की आय मिलती थी। लेकिन, खजूर की खेती ने तरक्की का नया अससास दिया है। इसके अलावा बेर उत्पादन से भी बेहतर आय प्राप्त हो रही है। किसान शिवकरण ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 25 हेक्टेयर जमीन है। पढ़ाई छोड़ने के बाद खेती से जुड़ा और परंपरागत फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। उन्होंने बताया कि कई साल मेहनत करने के बावजूद भी खेती से ज्यादा कुछ नहीं मिलता था। लेकिन, खजूर उत्पादन से जुडऩे के बाद परिवार के आर्थिक चक्र  में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बागवानी के कारण खेतों से आमदनी का आंकड़ा लाखों में पहुंच चुका है।  उन्होनें बताया कि बागवानी फसलों से अच्छी कमाई मिलती है। इस बात में कोई दोराय नहीं है। लेकिन इसके लिए खेतों में पूरी तरह से समर्पित होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि परंपरागत फसलों में मूंगफली, गेहूं और सरसों का उत्पादन होता है। इन फसलों से प्रति हेक्टेयर लाख रुपये की आमदनी मिल जाती है।

4 हैक्टयर में खजूर  

उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में खजूर की खेती से जुड़ा। 4 हेक्टेयर क्षेत्र में बगीचा स्थापित किया। 4-5 साल बाद उत्पादन मिलना शुरू हुआ तो आय का आंकड़ा लाखों में पहुंच गया। इससे उत्साह बढ़ा और आय बढ़ाने के लिए खजूर का प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि खेत में बरही और मेडजूल की स्म के पौधे लगे हैं। बरही के फे्रश फ्रूट बिक्री करता हॅू। वहीं, मेडजूल का उपयोग चूने बनाने में कर रहा है। इसके लिए इलेक्ट्रिक ड्रायर लगाया गया है। बगीचे में ड्रिप का जाल बिछा हुआ है। 

बेर से दो लाख

उन्होंने बताया कि 1 हेक्टेयर क्षेत्र में बेर का बगीचा स्थापित है। इससे भी सालाना दो लाख रुपये की आमदनी मिल जाती है। गौरतलब है कि किसान शिवकरण इससे पूर्व अनार की बागवानी से जुड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि 15 हेक्टेयर क्षेत्र में अनार का बीगचा स्थापित था। लेकिन, पौधे डेढ़ दशक पुराने होने के चलते पौधे नष्ट कर दिए हैं। अब नया बगीचा स्थापित करने की तैयार में हॅॅू। 

लाभकारी पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 8 गायें और 3 भैंस हैं। प्रतिदिन 40-50 लीटर दूध का उत्पादन मिल रहा है। दुग्ध की बिक्री डेयरी को 50 रूपए प्रति लीटर की दर से कर रहा हॅू।  इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, थोड़ी बहुत बचत मिल जाती है। पशु अपशिष्ट का उपयोग खाद बनाने में किया जा रहा है। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. आरएस राठौड़, एसकेआरएयू, बीकानेर


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सफलता की यह कहानी है रेखा देवी मिश्रा की। जिन्होंने झोपड़ी में रहते हुए अपने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्ती भूमिका निभाई। वहीं, खेती, पशुपालन में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। पशु सखी के रूप में राज्य सरकार ने इनको उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। रेखा देवी का कहना है कि लखनऊ से 10 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद जीवन को नई दिशा मिली। इसी का परिणाम है कि खेती और पशुपालन के बिना अब दिन गुजरता नहीं है। यूँ समझों, पशुपालन से जुडऩे के बाद मुझे उड़ान के लिए नये पंख मिल गए है। गौरतलब है कि रेखा पशुओं के वैक्सीनेशन से लेकर पशु उपचार से जुड़ी कई हर्बल दवाएं स्वयं तैयार करती है। उन्होने बताया कि खेती सम्बद्ध कार्यो से सालाना 5-7 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। मोबाइल 77338-47325