30 हजार से 7 लाख तक, महिला किसान ने बदली खेती की तस्वीर
(सभी तस्वीरें- हलधर)
पुर, भीलवाड़ा। डेढ़ बीघा जमीन से 15 लाख की आमदनी। लाभ का यह आंकड़ा दांतों तले अंगुली जरूर दबाने को मजबूर कर देगा। लेकिन, सच यही है। इतनी आमदनी संभव हो रही है हाईटेक नर्सरी के व्यवसाय से। हाईटेक नर्सरी की शुरूआत बिस्वा भर जमीन से हुई। लेकिन, अब डेढ़ बीघा जमीन अपने नाम कर चुकी है। इससे सालाना 6-7 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा मिल रहा है। कुछ ऐसा ही कमाल करने वाली महिला कृषक है संतोष देवी। जो नर्सरी में सब्जी, फल-फूल और सजावटी पौध तैयार कर रही है। किसान संतोष ने हलधर टाइम्स को बताया कि आठ साल पहले तक खेतों से 25-30 हजार रूपए की आय मिला करती थी। लेकिन, नर्सरी स्थापना के बाद से साल दर साल नर्सरी का क्षेत्र और आय का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि पुणें और गुजरात भ्रमण के दौरान नर्सरी व्यवसाय के बारे में जानने सीखने को मिला। शुरूआत एक बिस्वा जमीन से करके देखी। अब डेढ़ बीघा क्षेत्र में हाईटेक तकनीक को अपनाते हुए विभिन्न सब्जी फसलों के पौधे तैयार कर रही हॅू। उन्होंने बताया कि पहले खेतों में रबी-खरीफ फसलों का उत्पादन लेते थे। इससे कोई खास-आमदनी नहीं मिल पाती थी। लेकिन, संतोष यह था कि जमीन खाली नहीं है। बता दें कि संतोष के पास कुल 2 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए कुआं है। लेकिन, पानी लवणीय है। उन्होंने बताया कि पानी की लवणीयता के कारण शुरूआती साल में पौध तैयार करने में थोड़ी परेशानी आई। इसके बाद फार्म पौंड का निर्माण करवाया। इससे सिंचाई के लिए बरसाती पानी मिलने लगा है। गौरतलब है कि किसान संतोष ने 500 वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉली हाउस और 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र में नेट हाउस बनाया हुआ है। संतोष महज साक्षर है, लेकिन, फर्टीगेशन, वेंचुरी, ईसी-पीएच चेक करने वाले उपकरणों का बेहत्तर इस्तेमाल कर रही है।
सालाना 4 लाख पौधें
उन्होंने बताया कि डेढ़ बीघा क्षेत्र में स्थापित नर्सरी में सालाना चार लाख पौधें तैयार करके किसानों को बिक्री कर देती हॅू। इनमें मिर्च, टमाटर, बैंगन, कलर शिमला मिर्च, फूल-पत्तागोभी, ब्रोकली, बेलदार सब्जी, मटर, धनिया, पालक, के साथ-साथ पपीता, नींबू, फूलों में गेंदा, कलकती फूल, नौरंगा आदि की पौध शामिल है। इसके अलावा सजावटी पौधों की पौध भी तैयार कर रही हॅू। उन्होंने बताया कि प्रो-ट्रे पद्धति से पौध तैयार करती हॅू। ताकि, पौध खरीदने वाले किसानों को फसल का स्वस्थ उत्पादन मिल सकें। सब्जी पौध तैयार करने के लिए शैडनेट हाउस बनाया हुआ है।
पशुधन में यह
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 1 गाय और 1 भैंस है। पशुओं से प्राप्त दुग्ध का उपयोग घर में हो जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके फसल में उपयोग करती हॅू।
स्टोरी इनपुट: डॉ. केसी नागर, हिमांशु कुलदीप, मयंक गोयल, डॉ. एलके छाता, बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, आरजिया, भीलवाड़ा