देश में ‘ग्रोमोर ग्राम’ मॉडल प्रोग्राम लॉन्च, किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक
देश में ‘ग्रोमोर ग्राम’ मॉडल प्रोग्राम लॉन्च, किसानों तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक
(सभी तस्वीरें- हलधर)देश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। कृषि इनपुट और पोषक तत्व प्रबंधन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड ने किसानों के लिए ‘ग्रोमोर ग्राम मॉडल’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और उन्नत कृषि सेवाओं से जोड़ना है, ताकि खेती को अधिक उत्पादक, लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।
किसानों तक पहुंचेगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी
भारत में कृषि अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों द्वारा लगातार नई तकनीकों और खेती के उन्नत तरीकों पर काम किया जाता है। हालांकि, इन तकनीकों का लाभ अक्सर अंतिम स्तर तक किसानों तक नहीं पहुंच पाता। कई बार जानकारी के अभाव में किसान पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है।
‘ग्रोमोर ग्राम’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है। इसके तहत किसानों को उनके गांवों और खेतों पर ही वैज्ञानिक खेती की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्हें यह बताया जाएगा कि किस फसल में किस प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत है, किस समय कौन-सी खाद का उपयोग करना चाहिए और फसल प्रबंधन के कौन-कौन से तरीके उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
कंपनी का मानना है कि सही समय पर सही सलाह और तकनीक मिलने से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
गांवों में मिलेंगी आधुनिक कृषि सुविधाएं
इस कार्यक्रम के तहत किसानों को कई अत्याधुनिक कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें मिट्टी परीक्षण (Soil Testing), पत्तियों की जांच (Leaf Analysis), फसल स्वास्थ्य मूल्यांकन और खेत-विशेष कृषि सलाह जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
मिट्टी परीक्षण के माध्यम से किसानों को यह जानकारी मिलेगी कि उनके खेत की मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है। इसी आधार पर उन्हें उर्वरकों और पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग की सलाह दी जाएगी। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि उर्वरकों के अनावश्यक उपयोग पर भी रोक लगेगी।
इसके अलावा, फसलों की पत्तियों का परीक्षण कर पौधों की वास्तविक पोषण स्थिति का आकलन किया जाएगा। इससे किसानों को समय रहते पोषक तत्वों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी और फसलों को बेहतर विकास का अवसर मिलेगा।
ड्रोन तकनीक और डेमो प्लॉट होंगे आकर्षण का केंद्र
ग्रोमोर ग्राम मॉडल के अंतर्गत आधुनिक तकनीकों के प्रदर्शन पर भी विशेष जोर दिया गया है। किसानों के लिए गांवों में डेमो प्लॉट तैयार किए जाएंगे, जहां उन्हें नई किस्मों, उन्नत कृषि पद्धतियों और पोषक तत्व प्रबंधन के परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से दिखाया जाएगा।
इसके साथ ही ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। ड्रोन तकनीक के माध्यम से कीटनाशकों और पोषक तत्वों का छिड़काव तेज, सटीक और कम लागत में किया जा सकता है। इससे श्रम लागत कम होती है और रसायनों का समान वितरण सुनिश्चित होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन तकनीक भारतीय कृषि का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है और ऐसे कार्यक्रम किसानों को इस बदलाव के लिए तैयार करेंगे।
रिसर्च और खेत के बीच बनेगा सीधा संबंध
कृषि क्षेत्र में लंबे समय से यह चुनौती रही है कि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित तकनीकें और समाधान किसानों तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाते। परिणामस्वरूप वैज्ञानिक उपलब्धियों का पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पाता।
कंपनी के अनुसार, ‘ग्रोमोर ग्राम’ कार्यक्रम इसी समस्या का समाधान करने की दिशा में एक प्रयास है। इसके माध्यम से वैज्ञानिक शोध, कृषि विशेषज्ञों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा।
किसानों को फसल प्रबंधन, पोषक तत्व संतुलन, जल संरक्षण, रोग एवं कीट नियंत्रण और नई कृषि तकनीकों के बारे में नियमित जानकारी दी जाएगी। इससे खेती अधिक वैज्ञानिक और परिणामोन्मुख बनने की उम्मीद है।
75,000 किसानों को होगा सीधा लाभ
कार्यक्रम के पहले चरण में करीब 75,000 किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी का कहना है कि किसानों से प्राप्त प्रतिक्रिया और कार्यक्रम के परिणामों के आधार पर भविष्य में इसे और अधिक गांवों तथा राज्यों तक विस्तारित किया जाएगा।