कपास की बढ़ती कीमतों से टेक्सटाइल सेक्टर पस्त, ड्यूटी टैक्स हटाने की मांग
कपास की बढ़ती कीमतों से टेक्सटाइल सेक्टर पस्त, ड्यूटी टैक्स हटाने की मांग
(सभी तस्वीरें- हलधर)कपास की लगातार बढ़ती कीमतों से अब टेक्सटाइल उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों के असर से घरेलू स्तर पर भी कपास महंगी हो रही है, जिससे स्पिनिंग मिलों से लेकर गारमेंट निर्यातकों तक पूरी वैल्यू चेन दबाव में आ गई है।
उद्योग जगत ने सरकार से मांग की है कि निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और सप्लाई संतुलन के लिए कपास के ड्यूटी-फ्री आयात अनुमति दी जाए। बढ़ती कीमतों से मुनाफे पर असर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर, वे निर्यातक ज्यादा प्रभावित हैं, जो लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम कर रहे हैं और अचानक बढ़ी लागत को कीमतों में शामिल नहीं कर पा रहे हैं।
पूरी वैल्यू चेन पर असर का खतरा
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, द साउदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (SIMA) के महासचिव के. सेल्वराजू ने कहा कि कपास की कीमतों में तेजी का असर पूरे टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ेगा. “कपास की कीमतों में बढ़ोतरी निश्चित तौर पर पूरी वैल्यू चेन को प्रभावित करेगी, क्योंकि इसकी कीमतें रोजाना तेज़ी से बढ़ रही हैं.” उन्होंने बताया कि गारमेंट सेक्टर सबसे ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि यहां लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों को बढ़ाने की गुंजाइश कम होती है.
किसानों पर नहीं पड़ेगा असर
के. सेल्वराजू ने बताया कि ड्यूटी-फ्री आयात से किसानों को नुकसान नहीं होगा, क्योंकि अधिकतर किसान मार्च के अंत तक अपनी फसल बेच देते हैं. इसलिए अस्थायी तौर पर आयात शुल्क हटाने से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा. सरकार पहले 31 दिसंबर 2025 तक ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दे चुकी है, जिसके तहत करीब 30 लाख गांठ कपास आयात हुआ था, जबकि एडवांस ऑथराइजेशन के जरिए अतिरिक्त 7 लाख गांठ भी आई थी.