PM Kusum Yojana से बदली किस्मत, महिला किसान बनी आत्मनिर्भर

नई दिल्ली 10-Jun-2026 12:17 PM

PM Kusum Yojana से बदली किस्मत, महिला किसान बनी आत्मनिर्भर

(सभी तस्वीरें- हलधर)

झिकली, बांसवाड़ा। गहने गिरवी रखकर अंधेरे को चीरने वाली यह आत्मविश्वासी महिला कृषक है मोनिका कटारा। जिसने अपनी सोच से यह साबित कर दिया है कि अंधेरो से उजालों की ओर बढऩा ही जीवन है। इस कृषक महिला ने अपने साथ-साथ गांव की कई महिलाओं को ना केवल कुछ कर गुजरने का हाँंसला दिया। बल्कि, उनके समय और श्रम के साथ-साथ मानसिक दबाव को भी कम किया है। बता दें कि किसान मोनिका ने पीएम कुसुम योजना से लाभान्वित होकर अपने लिए घर बैठे रोजगार का सृजन किया है। साथ ही, गांव को भी मंजर बदलने के लिए नई दिशा दी है। किसान मोनिका ने हलधर टाइम्स को बताया कि बिजली की समस्या कोई नई बात नहीं थी। घंटों बिजली गुल रहना जैसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था। कई बार सुबह से रात तक बिजली नहीं रहती थी। जिससे खेती और घरेलू काम प्रभावित होते थे। लेकिन इस समस्या का सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ता था। गाँव की महिलाओं को गेहूँ और मक्का पिसवाने के लिए 1 से 2 किलोमीटर दूर बसी बस्तियों का रूख करना पड़ता था। सर्दी-गर्मी-बरसात में सिर पर अनाज का बोझ उठाकर मेरे जैसी कई महिलाओं को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बच्चे छोटे हो तो हमारे लिए परेशानी ओर बढ़ जाती थी। घर छोडने के बाद घर की चिंता दिमाग में बनी रहती थी। बरसात के दिनों में यह परेशानी और भी बढ़ जाती थी। क्योंकि, रास्ते खराब हो जाते थे और बिजली की अनियमितता के कारण चक्कियाँ भी समय पर नहीं चल पाती थीं। कुछ ऐसी ही परिस्थतियों ने मुझे हौंसलेमंद बनाया। 

उजाले की ओर ऐसे
उन्होंने बताया कि कृषि कार्यक्रमों में जाने से मुझे प्रधानमंत्री कुसुम योजना के बारे में पता चला। आवेदन किया और एक साल पहले खेत में 5 किलोवाट का सौर पैनल लगवाया। इससे उन्हें डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिली। लेकिन, सौर उर्जा के घरेलू उपयोग के बारे में मुझे पता नही था। लेकिन एक दिन स्थानीय सक्षम समूह की बैठक में सौर ऊर्जा के दूसरे फायदों से रूबरू हुई। इसके बाद जेवर गिरवी रखकर 40 हजार रूपए का जुगाड़ किया और आटा चक्की खरीद ली। मेरे हौंसले को देखते हुए वाग्धारा ने मुझे 5 एचपी का कन्वर्टर (यूएसपीसी) उपलब्ध कराया, जिससे सौर ऊर्जा से चक्की चलने लगी। अब इस काम से मासिक तीन से साढे तीन हजार रूपए की आमदनी मिल रही है। 

खेती से 70 हजार
उन्होंने बताया कि परिवार के पास 5 बीघा जमीन है। जिसमें मक्का, उड़द, चंवला, गेहूं, चना और मक्का का उत्पादन लेते है। उन्होंने बताया कि खरीफ फसल की बिक्री नहीं करती हॅू। क्योंकि, उत्पादित अनाज परिवार की आवश्यकता पूर्ति के काम आ जाता है। वहीं, रबी फसल से सालाना 70 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।

पशुपालन और पोषण वाटिका
उन्होने बताया कि दूध और सब्जी की आवश्यकता पूर्ति के लिए पशुपालन और पोषण वाटिका स्थापित की हुई है। पशुधन में 2 गाय, 4 बकरी और एक जोड़ी बैल मेरे पास है। वहीं, पोषण वाटिका में पैदा होने वाली सब्जी से थोड़ी बहुत कमाई हो जाती है। 

स्टोरी इनपुट: नरेन्द्र सिंह खंगारोत, वाग्धारा, बांसवाड़ा


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