नौकरी छोड़ी, डेयरी अपनाई: किसान की सालाना आय पहुँची 4.50 लाख

नई दिल्ली 10-Feb-2026 01:30 PM

नौकरी छोड़ी, डेयरी अपनाई: किसान की सालाना आय पहुँची 4.50 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जाखोड़ा, कोटा। कहते है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है। इस बात को साबित कर दिखाया है किसान हरीश कुमार नागर ने। जो खेत के साथ-साथ डेयरी में पसीना बहा रहे है। परिणाम अब प्रतिमाह 15-20 हजार रूपए की आय घर बैठे मिल रही है। किसान हरीश ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के चलते बीएससी करने के बाद बीएड़ की। इसके बाद नौकरी के लिए दौड़-धूप करना शुरू किया। लेकिन, सफलता नहीं मिली। इसके  बाद खेती से जुड़ गया। उन्होंने बताया कि परिवार के पास 15 बीघा जमीन है। परिजनों को खेती की जिम्मेदारी संभालते देख मैने पशुपालन का रूख किया और सफल भी रहा। हालांकि, पशुधन की संख्या अभी सीमित है। लेकिन, जैसे-जैसे लाभ मिल रहा है, उन्नत नस्ल के पशु खरीद रहा हॅू। इससे दुग्ध का उत्पादन बढाने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहंू, चना, सरसों, सोयाबीन आदि फसलों की बुवाई करता हॅू। इससे सालाना दो से ढ़ाई लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

किचन गार्डन भी

उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग के कार्यक्रमों में भाग लेने से किचन गार्डन के बारे में पता चला। इसके बाद खेत के कुछ हिस्से में परिवार के लिए जैविक सब्जी का उत्पादन लेना शुरू किया। किचन गार्डन में मिर्च, टमाटर, गोभी, पालक, मेथी, धनिया आदि फसलों का उत्पादन लेता हॅॅू। इससे भी परिवार का दैनिक खर्च घटाने में मदद मिली है। 

पशुपालन से आय एक नजर

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 6 भैंस और 4 गाय है। प्रतिदिन 20 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध डेयरी को 60 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर रहा हॅू। उन्होंने बताया कि पहले तो पशुधन का प्रबंधन परम्परागत तौर-तरीकों से करता था। लेकिन, बाद में पशुधन का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने लगा। इससे दुग्ध उत्पादन लागत में कमी आई है। वहीं, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पशुधन का स्वास्थ्य भी बेहत्तर बना रहता है। 

स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक उद्यान, कोट


ट्रेंडिंग ख़बरें