कृषि नवाचार से बदली किसान की किस्मत, 15 लाख हुई सालाना आय
(सभी तस्वीरें- हलधर)प्रेमपुरा, बूंदी। अंधेरों में उजालों की ओर बढऩे का नाम ही जिंदगी है। क्योंकि, दिन के उजालों में जुगनू अपनी पहचान नहीं बना पाते है। अपना हुनर जमाने को दिखाने के लिए उन्हें भी रात का इंतजार करना होता है। खेती के ऐसे ही जुगनू बनकर उभरे है किसान लटूरलाल प्रजापति। जो खेती से सालाना 10-12 लाख रूपए की आमदनी ले रहे है। साथ ही, बागवानी और सब्जी फसल उत्पादन से भी जुड़े हुए है। किसान लटूर ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 35 बीघा जमीन है। वर्ष 1996 में पढाई छोडऩे के बाद खेती से जुड़ गया। उन्होने बताया कि खेती से जुडऩे के बाद सही मार्गदर्शन का अभाव रहा। इस कारण परम्परागत फसल उत्पादन तक सीमित रहा। फिर, कृषि विज्ञान केन्द्र और कृषि विभाग के कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया। परिणाम रहा कि खेत अब समन्वित की कहानी कहने लगे है। इससे आय में भी बढौत्तरी देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, चना, लहसुन, धान का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना खर्च निकालने के बाद 11-12 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि सिंचाई केलिए मेरे पास कुआं, दो ट्यूबवैल है। वहीं, बिजली बचत के लिए सौर उर्जा संयंत्र लगाया हुआ है।
मिश्रित बागवानी
उन्होंने बताया कि आय बढाने के लिए दो बीघा क्षेत्र में मिश्रित बागवानी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। बगीचे में चीकू, मौसमी, एप्पल, एप्पल बेर, लसोड़ा, किन्नू आदि के पौधें लगाएं हुए है। उन्होंने बताया कि दो साल से बगीचे से आमदनी मिल रही है। सालाना 50 से 60 हजार रूपए की आमदनी बगीचे से मिलने लगी है।
मटर से 50 हजार
उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों का उत्पादन बाजार को देखते हुए करता हॅू। ताकि, भाव में जोखिम की स्थिति नहीं आए। इस कारण तीन बीघा क्षेत्र में अलग-अलग फसल का उत्पादन लेता रहता हॅू। इस बार तीन बीघा क्षेत्र में मटर का उत्पादन लिया था। इस फसल से 50 हजार रूपए प्रति बीघा का लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि लहसुन भंड़ारण के लिए पैक हाउस बनाया हुआ है।
उन्नत पशुपालन
पशुधन के रूप में मेरे पास 3 गाय और 6 भैंस है। प्रतिदिन 18-30 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल जाता है। दुग्ध का विपणन डेयरी को कर रहा हॅू। इससे मासिक 10-15 हजार रूपए की बचत मिल जाती है। वहीं, गोबर का उपयोग कम्पोस्ट खाद बनाने में करता हॅू।
स्टोरी इनपुट: डॉ. एस राम रूंडला, डॉ. महेश चौधरी, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. जीएस मीणा,
केवीके, बूंदी
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