सरकारी नौकरी की तैयारी छोड़ हाईटेक खेती शुरू की, अब कमाई 25 लाख सालाना

नई दिल्ली 23-Mar-2026 01:08 PM

सरकारी नौकरी की तैयारी छोड़ हाईटेक खेती शुरू की, अब कमाई 25 लाख सालाना

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सलोटिया, झालवाड़। अपने हाथों की मेहनत पर भरोसा करके लक्ष्य की ओर बढ़ा जाएं तो निश्चित ही सफलता मिलती है। ऐसा ही कुछ करके जिले के गौरव बनने वाले किसान है गौरव कुमार परिहार। जिन्होंने लॉकडाउन में केवीके से आजीविका चलाने का सबक पढ़ा। परिणाम रहा कि अब दूसरे किसानों को सबक देने लायक बन चुके है। गौरव का कहना है कि पहले मेरा लक्ष्य टीचर बनने का था। लेकिन, संरक्षित खेती से जुडऩे के बाद नौकरी से ज्यादा कमा रहा हॅू। बता दें कि इनकी सालाना आय 25 लाख रूपए के करीब है। किसान गौरव ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 50 बीघा जमीन है। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी होने के चलते बीएसटीसी की। इसके बाद टीचर बनने के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया। दो बार एग्जाम भी दिया। लेकिन, सफलता नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में लॉकडाउन लग गया। इस दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र पर नाबार्ड द्वारा प्रायोजित एक प्रशिक्षण में भाग लिया। इसके बाद खेती में कुछ नया करने का लक्ष्य बना। पहले तो पॉली हाउस और नेट हाउस बनाने का काम शुरू किया। लेकिन,थोड़ा बहुत फायदा मिला तो अपने खेत में 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में शैडनेट हाउस खड़ा कर दिया। उन्होंने बताया कि इस नेट हाउस में खीरे की फसल लेता हॅू। उन्होंने बताया कि तकनीक का फायदा देखकर पूरे 50 बीघा जमीन में बूंद-बूंद सिंचाई का जाल बिछा चुका हॅू। इससे ओपन फील्ड में भी सब्जी फसलो का अच्छा उत्पादन मिलने लगा है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, सरसों, चनास, सोयाबीन का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना दो से तीन लाख रूपए की शुद्ध बचत मिल जाती है। 

खीरे से 15 लाख

उन्होने बताया कि शैडनेट हाउस में सालाना खीरे की दो फसल का उत्पादन ले रहा हॅू। इससे सालाना 15 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि नेट हाउस से मिली आय को देखते हुए बाद में लोटनल आधारित सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। इससे भी अच्छी बचत मिलने लगी है। 

सब्जी से 5 लाख

उन्होंने बताया कि 5-6 बीघा क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। सब्जी फसलो की गुणवत्ता बेहत्तर बनाएं रखने के लिए लोटनल, प्लास्टिक मल्च और ड्रिप सिंचाई का उपयोग कर रहा हूॅ। सब्जी फसलो में भिंड़ी, करेला, टमाटर और मिर्च शामिल है। इसके अलावा लहसुन-प्याज का भी उत्पादन करता हॅू। उन्होनें बताया कि सब्जी फसलों से खर्च निकालने के बाद 5 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

पशुधन से आय

उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और 3 भैँस है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल जाता है। दुग्ध का उपयोग घर में हो जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग में ले रहा हॅू


ट्रेंडिंग ख़बरें


नौकरी को बाय-बाय: बीटेक पास उपजा रहा है खरबूज, सकल आय 10 लाख

इंजीनियरिंग करके दो साल के भीतर ही नौकरी को टाटा, बाय-बाय कहने वाला यह किसान है सतीश पवार। जो साल में तीन फसलो का उत्पादन लेकर कृषिगत बचत का आंकड़ा दोगुना कर चुका है। कोटा क्षेत्र में सतीश ने आलू और जायद फसलों के उत्पादन में अलग पहचान बनाई है। सतीश का कहना है कि नौकरी से जरूरतें पूरी होती। कभी, समृद्धि की झलक देखने को नहीं मिल पाती। अब परिवार के साथ रहकर जीवन का असली सावन देख रहा हॅू। उन्होने बताया कि मुझे नई पहचान और कृषि आय को नया फलक देने में कृषि वैज्ञानिको का मार्गदर्शन भी मेरे लिए अमूल्य है। गौरतलब है कि सतीश खरीफ में धान, रबी में आलू और जायद में खरबूज सहित दूसरी सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहे है। जिससे सालाना बचत का आंकड़ा 8-10 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। मोबाइल 78283-03623