मौन क्रांति से कमाई 8 लाख! बेजमीन युवक ने बदल दी तकदीर

नई दिल्ली 09-Jan-2026 12:26 PM

मौन क्रांति से कमाई 8 लाख! बेजमीन युवक ने बदल दी तकदीर

(सभी तस्वीरें- हलधर)

हलधर टाइम्स/ राजसमंद।

मेघाखेड़ा। मौन हवाईजहाज के रूप में पहचान रखने वाली मधुमक्खियां बेजमीन लोगों की जिदंगी को बदलने का मादा रखती है। यकीन नही हो तो मिलिए डॉ. सीताराम सीरवी से। जिन्होंने मौन के सहारे अपनी स्टार्टअप को उद्यम का रूप दिया और आईजी हनी ब्रांड नाम से अपनी पहचान बनाई है। उनका कहना है कि 5 बॉक्स के सहारे शुरू  किए इस स्टार्टअप से सालाना साढे 4 लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। जबकि, खेती की आय मिलाकर सकल आय का आंकड़ा 8 लाख रूपए के करीब है। एंटरप्रेन्योर डॉ. सीताराम ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास जमीन का कुल रकबा 0.875 हैक्टयर है। जिसमें भी सिंचित क्षेत्र 0.375 हैक्टयर है। इस कारण खेती से आय का छोर शुरू से ही कमजोर रहा। उन्होंने बताया कि कृषि से स्नातकोत्तर होने से पूर्व ही अपने स्टार्टअप के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। इसी का परिणाम आईजी ब्रांड नाम है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में 5 कॉलोनी के साथ अपना स्टार्टअप शुरू किया। तकनीक ज्ञान मेरे पास था। इस कारण कोई परेशानी नहीं आई। समय के साथ कालोनी की संख्या बढ़ाता रहा। वर्तमान में मेरे पास 100 कालोनी है। जिससे सालाना साढे चार लाख रूपए का मुनाफा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि यह ऐसा व्यवसाय है, जिसमें लागत कुछ नहीं है। जबकि, आय के रास्ते तीन है। उन्होंने बताया कि इसलिए मधुमक्खीपालन को मौन क्रांति की संज्ञा दी गई है। क्योंकि, इसमें शहद, मोम और परागण से आमदनी प्राप्त की जा सकती है। गौरतलब है कि डॉ. सीताराम के स्टार्टअप का प्रभाव जिले के कई गांवो में देखने को मिल रहा है। कई युवा इस व्यवसाय से जुड़ चुके है

खेती से लाभ

उन्होंने बताया कि 0.375 हैक्टयर जमीन में गेहूं, मक्का, कपास और चारा फसल का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना डेढ़-दो लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। सिंचाई के लिए कुआं और ट्यूबवैल मेरे पास है। फसल की लागत घटाने के लिए कई जैविक उपाय अपना रहा हॅू। इसके अलावा मिश्रित बागवानी में नींबू और अमरूद के पौधें शामिल है। वहीं, खेत की मेड़ पर सागवान के पौधे लगाएं हुए है।

दुग्ध उत्पादन भी लाभकारी

उन्होंने बताया कि पशुधन में 5 भैंस और एक बैल की जोड़ी परिवार के पास है। प्रतिदिन 8-10 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। उन्होने बताया कि एक समय का दुग्ध डेयरी को ब्रिकी कर देता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद बना रहा हॅॅू।