तीन ट्यूबवेल, फसल विविधीकरण और बागवानी से किसान बना लखपति
(सभी तस्वीरें- हलधर)
बाड़मेर। राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में स्थित बाड़मेर की विषम जलवायु, भौगोलिक परिस्थितियों और पानी की कमी के बीच खेती करना किसानों के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। सीमित वर्षा और अनिश्चित मौसम के कारण यहां परंपरागत बरानी खेती से अच्छी आमदनी हासिल करना आसान नहीं है। लेकिन मेहनत, लगन और खेती में विविधीकरण के जरिए किसान अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकते हैं। इसकी मिसाल हैं बाड़मेर जिले के हरियाली नाड़ी गांव के किसान जसराज सेजू, जिन्होंने सीमित संसाधनों से शुरुआत कर आज खेती, बागवानी और पशुपालन को अपनी आय का मजबूत आधार बनाया है। बता दें कि किसान जसराज को खेती से सालाना 25 लाख रूपए की आमदनी हो रही है। किसान जसराज ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 180 बीघा कृषि भूमि है। पहले पूरी जमीन बरानी थी। बारिश पर निर्भरता और कम उत्पादन के कारण आमदनी भी सीमित रहती थी। परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूरी में मकान चिनाई का काम करना पड़ता था। उन्होने बताया कि इस काम से जो बचत मिली, इससे ट्यूबवेल खुदवाया। इससे सिंचाई की सुविधा मिली और खेती से जुड़ गया। सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद जसराज ने विभिन्न फसलों की खेती शुरू की। उत्पादन और आमदनी में बढ़ोतरी होने पर उन्होंने दो और ट्यूबवेल खुदवाए। इससे उनकी पूरी कृषि भूमि पर सिंचाई की व्यवस्था मजबूत हुई और अब वे खरीफ -रबी दोनों सीजन में फसल उत्पादन ले रहे हैं। खरीफ में मूंग, मोठ, बाजरा और ग्वार, जबकि रबी में जीरा और इसबगोल की खेती करते हैं। फसल विविधीकरण और सिंचाई की सुविधा से उनकी सालाना कृषि आय करीब 25 लाख रुपए तक पहुंच गई है।
अपनाई बेर की बागवानी
खेती से आय बढऩे के बाद जसराज ने अपनी आमदनी के नए स्रोत विकसित करने पर ध्यान दिया। वे बीएलएमसी परियोजना से जुड़े और बागवानी को अपनाया। करीब पांच साल पहले उन्होंने अपने खेत में बेर के 50 पौधे लगाए। इन पौधों से अब उन्हें सालाना लगभग 25 हजार रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। साथ ही, उन्होंने घर की जरूरतों के लिए किचन गार्डन भी स्थापित किया है, जिससे परिवार को ताजी सब्जियां मिलती हैं और बाजार पर निर्भरता कम होती है।
गाय और बकरी पालन
जसराज ने खेती के साथ पशुपालन को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बनाया है। उनके पास आठ गाय हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 8 से 10 लीटर दूध का उत्पादन होता है। दूध से वे घी तैयार करते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है। इसके अलावा वे 10 बकरियों का पालन भी कर रहे हैं। बकरी पालन से उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपए की आय होती है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. प्रदीप पगारिया, अनिल कुमार, वेलाराम, बीएलएमसीएल, केवीके, गुड़ामालानी