निर्यात तय करेगा लहसुन के भाव

नई दिल्ली 13-Apr-2026 06:13 PM

निर्यात तय करेगा लहसुन के भाव

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश की हाड़ौती लाइन की कृषि उपज मंडिय़ों में सफेद सोने का जादू इस साल किसानों के सिर चढक़र बोल रहा है। बेहत्तर भाव के चलते किसान काफी खुश नजर आ रहे है। वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह जादू मिडिल ईस्ट युद्ध के परिणामों पर निर्भर करता है। क्योंकि, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में हाड़ौती के लहसुन की अच्छी मांग रहती है। यदि युद्ध से निर्यात प्रभावित नहीं हुआ तो लहसुन के प्रति क्विंटल भाव बढऩा तय है। लेकिन, निर्यात ठप्प होने की स्थिति में ज्यादा तेजी की उम्मीद टूट सकती है। 

जारी है जोरदार आवक

इस बार किसानों को बेहत्तर भाव मिलने से हाड़ौती लाइन की मंडियों में लहसुन की जोरदार आवक बनी हुई है। जहां पर ऊंटी बोम लहसुन 17 हजार 10 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। वही देशी बोम साइज लहसुन 9 से 11 हजार, फूलगोला 7 से 9 हजार, लड्डू 5 से 7 हजार और लाटरी 3500 से 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। 

मिल रहे है औसत भाव

लहसुन-प्याज फसल के विशेषज्ञ एके मिश्रा ने बताया कि इस बार किसानों को लहसुन के औसत भाव मिल रहे है। कमोबेश यही स्थिति मध्यप्रदेश में भी देखी जा रही है। लहसुन के भाव 18 हजर रूपए प्रति क्ंिवटल बोले जा रहे है। उन्होने बताया कि भाव की यह चमक केवल उम्दा क्वालिटी लहसुन तक सीमित है। जबकि औसत भाव 10-11 हजार रूपए प्रति क्विंटल चल रहे है। इससे किसानों के लिए लहसुन की फसल लाभकारी साबित हो रही है। उन्होने बताया कि भाव में तेजी की संभावना निर्यात पर निर्भर करती है। 

एरिया घटने का भी प्रभाव

गौरतलब है कि प्रदेश में इस बार 90 हजार हैक्टयर क्षेत्र में लहसुन की बुवाई हुई है। जबकि, पिछले साल सवा लाख हैक्टयर क्षेत्र में फसल की बुवाई दर्ज हुई थी। वहीं, फरवरी माह के दौरान तापमान में बढौत्तरी से लहसुन की औसत साइज नहीं बन पाई। इस कारण भी लहसुन के दामों मे तेजी बनी हुई है।


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