हलवाई ने सब्जी से बदली खेतों की सूरत

नई दिल्ली 24-Oct-2024 10:33 AM

हलवाई ने सब्जी से बदली खेतों की सूरत

(सभी तस्वीरें- हलधर)

इससे सालाना 2-3 लाख रूपए की आमदनी मिलने लगी है। गौरतलब है कि बंशीलाल सब्जी फसलों के साथ-साथ पशुपालन और बकरीपालन से भी जुड़े हुए है।  मोबाइल 99292-92741
मादरीचौक गुड़ा, राजसमंद। खेतों की सूरत बदलने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। मृदा और पानी की स्थिति को परखकर फसल का चयन कीजिए। साथ ही, बाजार की मांग और नगदी फसल के उत्पादन पर फोकस। आय के आंकड़े को छलांग मारते समय नहीं लगेगा। किसान बंशीलाल गुर्जर ने भी यही किया है । बंशीलाल, हलवाई के काम के साथ-साथ खेतों में भी मेहनत की मिठास घोल रहे है। इससे खेती से आय का आंकड़ा 3 लाख रूपए सालाना तक पहुंच चुका है।  किसान बंशीलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 8 बीघा कृषि भूमि है। सिंचाई की व्यवस्था कुआं और ट्यूबवैल पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि पहले परम्परागत तौर-तरीकों से खेती करते रहा। इससे कई बार फसली नुकसान उठाना पड़ता था। इस स्थिति को देखते हुए हलवाई का काम सीखा और ऑफ सीजन में खाने-कमाने के लिए जयपुर चला जाता था। लेकिन, अब पूरी  तरह से खेती से जुड़ चुका हॅू। हालांकि, हलवाई का काम अब आस-पास गांवों तक सीमित कर लिया है। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र से प्रशिक्षण लेने के बाद फसल उत्पादन के तौर-तरीकों में बदलाव ला रहा हॅू। साथ ही, आय बढौत्तरी के लिए समय के साथ पशुधन की संख्या भी बढा रहा हॅू। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलो में गेहूं, जौ, मक्का, उड़द आदि फसलों का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना लाख से डेढ़ लाख रूपए की आय मिल जाती है।
सब्जी फसल भी लाकारी
उन्होंने बताया कि आमदनी बढ़ाने के लिए सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हूँ। पहले सब्जी फसलों की खेती आधा बीघा तक सीमित थी। लेकिन, अब बीघा भर क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। सब्जी फसलों में टमाटर, मिर्च की ज्यादा बुवाई करता हॅू। इसके अलावा मटर, मूली, गाजर, गोभी का भी थोड़ा-थोड़ा उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से 40-50 हजार रूपए की आय मिल जाती है। 
उन्नत पशुधन
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 भैंस, 3 गाय और 10 बकरियां है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध की बिक्री घर बैठे ही 50 रूपए प्रति लीटर की दर से हो जाती है। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, 5-6 हजार रूपए महीने की बचत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि अभी बकरियों से आमदनी मिलना शुरू नहीं हुई है।  पशु अपशिष्ट से खाद तैयार करके उपयोग में लेता हॅू।


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कहते है कि परिवार के आर्थिक हालात ठीक नही हो तो सफलता के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। किसान औंकारमल मेघवाल के साथ भी यही हुआ है। औंकार ने बताया कि पहले खेतों से पैदावार कम मिलती थी। इससे परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल लगता था। मजबूरी में रोटी-रोटी की तलाश ने मुझे दुबई पहुंचा दिया। आठ साल में जो कमाया, यहां लौटकर खेतों में निवेश किया। इसी का परिणाम है कि अब खेतों से 10-12 लाख रूपए सालाना की आमदनी मिल रही है। गौरतलब है कि किसान औकारमल डेढ़ दशक से सब्जी फसलो की खेती कर रहे है। साथ ही, इन्होने प्रति बीघा परम्परागत फसलों का उत्पादन बढ़ाने में भी सफलता पाई है। मोबाइल 9983231901