बागवानी से बदल रही किसान की तकदीर, शुरुआती आय पहुंची ₹4 लाख सालाना
(सभी तस्वीरें- हलधर)
मोडक़, कोटा। बागवानी फसलों का उत्पादन किसानों को पंख देते देर नहीं करता है। यकीन नहीं है तो किसान मोहम्मद ईस्लाम से मिलिए। यह किसान परम्परागत फसलों का उत्पादन करके सालाना लाख से सवा लाख रूपए की शुद्ध बचत ले पाता था। लेकिन, अब जमीन के आधे रकबे से 4 लाख रूपए का शुद्ध लाभ ले रहा है। आमदनी के आंकड़े में यह बूम देखने को मिला है अमरूद की खेती से। उनका कहना है कि बागवानी फसलों से परम्परागत फसलो से ज्यादा आमदनी मिलती है। इन फसलों की लागत काफी कम है। जबकि, आमदनी ज्यादा। किसान मोहम्मद ईस्लाम ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 15 बीघा कृषि भूमि है। 10वीं पास करने के साथ ही मैं खेती से जुड़ गया। लेकिन, उस समय खेती मेें दम नहीं देखकर आईस फैक्ट्री शुरू कर दी। बर्फ बनाता और बिक्री करता। करीब तीन दशक तक यह काम किया। लेकिन, अब बर्फ की मांग काफी कम हो चुकी है। इस कारण परिवार का खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा था। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री को बंद करके कुछ नया करने के लिए खेती से जुड़ा और उद्यान विभाग की सहायता से 4 साल पहले अमरूद का बगीचा स्थापित किया। इससे अब उत्पादन मिलने लगा है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलो की तुलना में मुझे बागवानी फसलों का हिसाब अच्छा लगा। एक बार निवेश के बाद इसमें लाभ ज्यादा और खर्च काफी कम है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास ट्यूबवैल है और एक कुआं भी है। परम्परागत फसलों में सरसों, गेहूं, सोयाबीन का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
8 बीघा मेें बगीचा
उन्होंने बताया कि आधी से ज्यादा जमीन अमरूद के नाम कर दी है। 8 बीघा जमीन में अमरूद का बगीचा लगाया हुआ है। बगीचे से इस साल उत्पादन मिला है और 4 लाख रूपए की शुरूआती आय प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि छोटे किसानों के लिए बागवानी फसलों का उत्पादन ज्यादा लाभकारी है। क्योंकि, इन फसलो का रख-रखाव परम्परागत फसलों से काफी सस्ता है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में बचत का पता ही नहीं चलता था।
पशुपालन से भी आय
उन्होने बताया कि पशुधन मं मेरे पास दो भैंस है। प्रतिदिन 15 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। इसमे से 10 लीटर दुग्ध उपभोक्ताओं को बिक्री कर देता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, खेती के लिए गोबर की खाद मिल जाती है।
स्टोरी इनपुट: एनबी मालव, उपनिदेशक उद्यान, कोट