11वीं में देखा भविष्य, अब कमा रहे है 13 लाख सालाना

नई दिल्ली 11-Dec-2025 12:56 PM

11वीं में देखा भविष्य, अब कमा रहे है 13 लाख सालाना

(सभी तस्वीरें- हलधर)

धोईन्दा, राजसमंद। किसान के पास जमीन का रकबा भले ही कम हो। लेकिन, दिमाग से उद्यमी हो तो अच्छे दिन आते ज्यादा समय नहीं लगता। कुछ ऐसे ही संघर्ष की कहानी है किसान ललित प्रजापत की। जिन्होंने बचपन से ही अपना भविष्य देख लिया। परिणाम रहा कि आज अपने साथ-साथ दूसरों को रोजगार मुहैया करवा रहे है। साथ ही, सालाना 12 से 13 लाख रूपए का शुद्ध लाभ देसी-विदेशी सब्जी उत्पादन और नर्सरी व्यवसाय से प्राप्त कर रहे है। गौरतलब है कि ललित ने 11वीं में पढऩे के दौरान ही नर्सरी व्यवसाय में कदम रख दिया था। इसके बाद स्नातक की और फिर पूरी तरह से खेती से जुड़ गए। किसान ललित ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास जमीन का रकबा कम है। इस कारण परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से ही कमजोर रही। उन्होने बताया कि परिवार की आर्थिकी में बदलाव लाने के लिए 11वीं के दौरान ही संघर्ष करना शुरू कर दिया था। दो पैसे की आय के लिए शुरूआत नर्सरी व्यवसाय से की। पौधों की बिक्री शुरू हुई तो थोड़ा हौंसला बढ़ा। इसके बाद स्थानीय स्तर पर ही फल-फूल के पौधें तैयार करना शुरू कर दिया। बाद में दूसरे राज्यों से नर्सरी संचालकों से सम्पर्क बढ़ता गया और सभी फल-फूल की अलग-अलग किस्मों से पौधों की उपलब्धता बढऩे लगी। गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने से स्थानीय उपभोक्ताओं का विश्वास भी समय के साथ बढ़ता रहा। इससे नर्सरी व्यवसाय चल निकला और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव देखने को मिला। उन्होनें बताया कि इसके बाद मैने किसानों की जरूरत के आधार पर सब्जी पौध तैयार करना शुरू कर दिया। गौरतलब है कि किसान ललित के परिवार के पास महज 7 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए दो कुएं है। उन्होने बताया कि खेत में परम्परागत फसल में परिवार की आवश्यकता पूर्ति के लिए ऑर्गेनिक गेहूं का उत्पादन लेता हॅू। थोड़ी जमीन में गायों के लिए हरे चारे की बुवाई कर देता हॅू।

देसी-विदेशी सब्जियां

उन्होंने बताया कि सब्जी फसल का उत्पादन वर्षभर चलता रहता है। करीब ढ़ाई से तीन बीघा क्षेत्र में सब्जी फसल का उत्पादन लेता हॅू। सब्जी फसल में ब्रोकली, लालपत्ता गोभी, फूलगोभी, पत्तागोभी, मूली, लेट्यूस, मिर्च, टमाटर, पालक, मैथी, धनिया आदि फसल शामिल है। उन्होंने बताया कि इन फसलों के उत्पादन से सालाना साढे तीन से चार लाख रूपए का शुद्ध लाभ मिल जाता है। गौरतलब है कि किसान ललित किसानों को सब्जी पौध भी उपलब्ध करवा रहे है। इससे भी आय बढाने में मदद मिली है।

नर्सरी के मालिक

उन्होंने बताया कि नर्सरी से भाग्य नई करवट ले रहा है। नर्सरी में अमरूद, नींबू, आम, कटहल, गुलाब, क्रिसमस, गुलदाउदी,  एरेका सहित दूसरे पौधें तैयार करता हॅू। गौरतलब है कि ललित  जय मेवाड़ महादेव नाम से नर्सरी चला रहे है। साथ ही, दूसरे नर्सरी संचालको को भी थोक भाव में पौधें उपलब्ध करवा रहे है। उनका कहना है कि नर्सरी के व्यवसाय से साालाना 7 से 10 लाख रूपए का शुद्ध लाभ मिल रहा है। गौरतलब है कि ललित ने अपने साथ-साथ तीन चार व्यक्तियों को रोजगार से जोड़ा हुआ है।

वर्मी कम्पोस्ट से भी आय

उन्होंने बताया कि पहले डेयरी व्यवसाय से भी जुड़ा हुआ था। लेकिन, नर्सरी का काम बढने के बाद पशुओं की संख्या को सीमित कर दिया है। वर्तमान में मेरे पास दो गाय है। दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहा हॅू। वर्मी कम्पोस्ट की 10 बेड मेरे पास है। उन्होंने बताया कि अपनी आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले वर्मी खाद की बिक्री किसानों को कर देता हॅू।


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