6 साल में जीरो से बना हुआ हीरो, सलाना मुनाफा 42 लाख

नई दिल्ली 14-Apr-2026 04:59 PM

6 साल में जीरो से बना हुआ हीरो, सलाना मुनाफा 42 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

लिचाना, अजमेर। खेती करते हुए जितना समय नहीं हुआ। उससे ज्यादा तरक्की करना, आसान काम नहीं है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है किसान धर्माराम सुंदरिया ने। जो 14 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में संरक्षित फसलों का उत्पादन ले रह है और एक फसल से औसतन 6 लाख रूपए मुनाफा कमा रहे है। उनका कहना है कि साल में दो बार फसल का उत्पादन होता है। इससे आय का अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है। किसान धर्माराम ने हलधर टाइम्स को बताया कि पढ़ाई छोडऩे के बाद से खेती से जुड़ा हॅू। परिवार के पास 10 बीघा जमीन है। लेकिन, 50 बीघा जमीन लीज पर ली हुई है। उनका कहना है कि पहले तो परंपरागत फसल उत्पादन तक ही सीमित रहा। लेकिन, संरक्षित खेती से सम्पन्नता की चर्चा सुनने के बाद मुझसे रहा नहीं गया। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में खेती की शुरुआत किराए के पॉली हाउस से हुई। इस दौरान फसल उत्पादन का तौर-तरीका समझने का मौका मिला। इसके बाद अपनी जमीन पर संरक्षित संरचना को आकार देेना शुरू किया और 8 साल के भीतर ही 14 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में चार पॉली हाउस का निर्माण करवाया लिया। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस से मिलने वाली आय को देखते हुए अब परम्परागत फसलों का उत्पादन लेना छोड़ दिया है। 

6 साल में दिया आकार

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 तक लीज पर पॉली हाउस लेकर खेती करता था। लेकिन, वर्ष 2020-21 के बाद से 4 हजार वर्ग मीटर के तीन और दो हजार वर्ग मीटर का एक पॉली हाउस तैयार करवा लिया। सिंचाई के लिए मेरे पास ट्यूबवैल है और बूंद-बूंद सिंचाई का उपयोग कर रहा हॅू। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस खेती में सारा खेल बाजार भाव पर चलता है। इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर ही फसल की बुवाई करता हूँ। पॉली हाउस में खीरा और रंगीन शिमला मिर्च का उत्पादन हो रहा है। उन्होनें बताया कि संरक्षित खेती से 40-42 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है। 

ओपन में टमाटर-टिंड़ा

उन्होंने बताया कि बाजार मांग को देखते हुए मैदानी फसलों में टमाटर और चप्पल टिंड़ा का उत्पादन करता हॅू। इस फसल से पॉली हाउस खेती का आधा खर्च निकल जाता है। 

पशुपालन से भी लाभ

उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 गाय है। प्रतिदिन 10-15 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। उन्होने बताया कि दुग्ध का उपयोग खेत पर लेबर की चाय-पानी में हो जाता है। वहीं, सब्जी अपशिष्ट पशु चारे में काम आ जाता है। पशु अपशिष्ट का उपयोग खाद बनाने में कर रहा हूॅ