राजस्थान की खेती में क्रांति: जैविक-प्राकृतिक मॉडल लागू
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। बढ़ती उर्वरक खपत को घटाने के लिए राज्य सरकार ने जैविक और प्राकृतिक खेती का दायरा बढाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत वर्ष 2030 तक 10 लाख हैक्टयर क्षेत्र को जैविक में बदलने का लक्ष्य रखा है। गौरतलब है कि जैविक की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2047 यानी विकसित राजस्थान के तैयार ब्लू प्रिंट में जैविक-प्राकृतिक खेती को भी रोडमैप में जगह दी है। इससे कहा जा सकता है कि जैविक -प्राकृतिक खेती को लेकर केन्द्र और राज्य प्रवर्तित अनुदान योजना भविष्य में बंद नहीं होगी। यह जरूर है कि सरकार हर बार के जैसे योजना के नाम में समय के साथ बदलाव कर सकती है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन अभी एक साल के लिए ही लागू किया है। लेकिन, ब्लू प्रिंट के लक्ष्य पर गौर करें तो यह योजना जारी रहेगी। क्योंकि, बिना सरकारी सहायता के लक्ष्य तक पहुंचाना काफी मुश्किल होगा।
3.68 लाख हैक्टयर में खेती
संयुक्त निदेशक कृषि (एटीसी) डॉ. अर्जुनलाल ने बताया कि प्रदेश मेें अब तक साढे तीन लाख हैक्टयर से ज्यादा क्षेत्रफल को जैविक में बदला जा चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में करीब 52 हजार हैक्टयर को जैविक में लाने का लक्ष्य कृषि विभाग ने रखा है।

जैविक पर फोकस क्यों
सरकार के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों का मनाना है कि जैविक और प्राकृतिक खेती से कृषि लागत में कमी आती है। साथ ही, पोषणयुक्त अनाज उत्पादन से निर्यात की संभावना भी बढ़ जाती है। जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।