विकसित राजस्थान के लिए खेत गोदाम पहल जरूरी

नई दिल्ली 06-Apr-2026 06:07 PM

विकसित राजस्थान के लिए खेत गोदाम पहल जरूरी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। आम के निवाले और किसान की दिहाड़ी को कभी बवंडर ले उड़ती है तो कभी आसमानी आफत ले डूबती है। किसान करें भी तो क्या...। ये सवाल खेतिहर के सामने सालों से बना हुआ है। लेकिन सरकार ने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। शायद यही कारण है कि किसान हर साल आपदा के शिकार होते है, आंसू बहाते और दिवालिया होते जाते है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि विजन विकसित राजस्थान को धरातल देने के लिए इस स्थिति को बदलना बेहद आवश्यक है। क्योंकि, उपज का आपदा की भेंट चढऩा किसान के लिए नहीं नहीं, आम उपभोक्ता और सरकार के लिए भी नुकसादायी है। अक्सर आपने देखा होगा, फसल कटाई के समय आंधी-बारिश और ओलावृष्टि, हर आए साल की कहानी बन चुकी है। वैज्ञानिक इसे ग्लोबल वार्मिंग ओर ऋतु चक्र में बदलाव का प्रभाव मानते है, मौसम विभाग पश्चिमी विक्षोभ का असर और सरकार प्राकृतिक आपदा। इस स्थिति में किसान करें तो क्या करें? क्योंकि, खेत-खलिहान में आंखों के सामने मटियामेट होती फसल आंसू ही नहीं, किसान का दिवाला भी निकालती है। क्योंकि भीगी हुई फसल को बाजार में दाम नहीं मिलता और किसान के अरमानों को उनका जहां नहीं मिलता। आसमानी आफत को रोकने का कोई शर्तिया इलाज तो किसी के पास है नहीं।

यह है भंड़ारण की स्थिति
फसल भण्डारण तक आ गई है, तो किसानों को जागरूक होना भी जरूरी है। वैसे तो प्रदेश में सरकारी-गैर सरकारी क्षेत्र में बने 17.20 लाख एमटी भंड़ारण की क्षमता विकसित हो चुकी है। कुल भंड़ारण क्षमता में 96.10 फीसदी खाद्यान्न भंड़ारण के लिए आरक्षित है। सरकार वर्ष 2025-26 से किसानों को भंड़ारण शुल्क पर भारी छूट दे रही है। भंड़ारण पर सामान्य श्रेणी के किसानों को 60 फीसदी तो एससी-एसटी किसानों को 70 फीसदी तक छूट दी जा रही है। वहीं, वेयरहाउस रसीद के बदले ऋण सुविधा भी किसानों को मिल रही है। लेकिन, अधिकांश किसान इस बात से अनजान है। दूसरा कारण, लघु-सीमांत किसानों को पैसों की जरूरत। शायद यही कारण है कि छोटे किसान फसल तैयार होते ही उसे मंडी में दिखाता है। यदि किसान थोड़ा धैर्य रखे और सरकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता दिखाएं तो ना केवल फसल के भाव अच्छे मिलेंगे। 

हलधर व्यू: खेत गोदाम पर मिले अनुदान
फसल को सुरिक्षत रखने के लिए कृषि विपणन विभाग के द्वारा वेयरहाउस बनाने पर लागत का 50 फीसदी अनुदान किसानों को दिया जा रहा है। लेकिन इस योजना का लाभ लघु और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से मिलना संभव नहीं है। क्योंकि एक वेयरहाउस की कीमत करोड़ में होती है। ऐसे में जरूरी है कि लघु और सीमांत किसानों को खेत गोदाम निर्माण पर सरकार अनुदान दें। सामुदायिक फार्मपौंड योजना अथवा प्याज भंंड़ारण जैसी योजना के तर्ज पर खेत गोदाम योजना शुरू की जा सकती है। 

अभी फौरे उपाय पर जोर
प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को फौरी सलाह कृ षि और मौसम विभाग के द्वारा दी जाती रही है। यानी खेत-खलिहान में फसल को आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से बचाव के उपाय करना। इसके लिए किसान फसल कटाई वाले दिन ही उसे सुरक्षित स्थान पर भंड़ारित करें। मौसम अलर्ट और सलाह पर अमल करें। लेकिन जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ऐसी सलाह से किसान का भला होना संभव नहीं है। 


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