खाद सब्सिडी पर महंगाई की मार ! सरकार पर बढ़ेगा वित्तीयभार ।
(सभी तस्वीरें- हलधर)3 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है सरकार का बोझ । देश में बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में तेजी का असर अब खाद सब्सिडी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का खाद सब्सिडी बिल 3 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है।
किसानों को राहत, लेकिन सरकार पर बढ़ेगा दबाव
सरकार किसानों को सस्ती दरों पर यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए भारी सब्सिडी देती है। लेकिन वैश्विक स्तर पर गैस, फॉस्फेट और पोटाश की कीमतों में बढ़ोतरी से सब्सिडी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में सरकार को अतिरिक्त बजटीय प्रावधान करना पड़ सकता है।
डीएपी और पोटाश पर सबसे ज्यादा असर
डीएपी और पोटाश जैसे आयात आधारित उर्वरकों की लागत में तेज उछाल देखने को मिला है। इसके चलते कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी राशि भी बढ़ानी पड़ रही है, ताकि किसानों पर सीधे कीमतों का बोझ न पड़े।
खरीफ सीजन से पहले बढ़ी चिंता
खरीफ सीजन नजदीक आने के साथ ही खाद की मांग बढ़ने लगी है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाए और बाजार में किसी तरह की किल्लत न हो।
अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद सब्सिडी का बढ़ता बोझ सरकार के वित्तीय घाटे पर असर डाल सकता है। हालांकि सरकार किसानों को राहत देने के लिए फिलहाल सब्सिडी व्यवस्था जारी रखने के पक्ष में नजर आ रही है।