सवाल कौन मार रहा है किसान का हक
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी भले ही जिंस बिक्री में बिचौलियों की भूमिका खत्म होने की बात कह रहे हो। लेकिन, जिंस विपणन में अब भी बिचौलियां ही चांदी कूट रहे है। इस बात का अंदाजा चुरू और बीकानेर जिले में सामने आए फर्जी गिरदावरी के मामलों से लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से मूंगफली, मूंग, उड़द और सोयाबीन जैसी फसलो की खरीद करने वाली है। लेकिन, इस खरीद का कितना लाभ वास्तविक किसान को मिलेगा, इस बात पर संशय बना हुआ है। क्योंकि, इन दोंनों जिलों में 15 हजार से ज्यारा फर्जी गिरदावरी के मामले अब तक सामने आ चुके है। ऐसे मेें सवाल यह उठता है कि फर्जी गिरदावरी से जिंस बिक्री का लाभ कौन उठा रहा है? इस बात की जांच सरकार के द्वारा करवाई जाएं तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
ऐसे समझे खेल
कृषि उपज मंडियों में मूंगफली और मूंग की आवक शुरू होने के साथ ही फर्जी गिरदावरी का खेल शुरू हो जाता है। जैसे ही एमएसपी पर जिंस बिक्री के लिए ऑनलाइन पंजीयन शुरू होते है, वैसे ही फर्जी गिरदावरी वाले किसान का हक डकार जाते है। शायद यही कारण है कि इस साल बीकानेर जिले में 5,954 और चुरू जिले में 9, 819 मामले फर्जी गिरदावरी और पंजीयन के पाए गए है। हालांकि, जांच के बाद राजफैड ने पंजीयन टोकन को निरस्त कर दिया है। लेकिन, सवाल अब भी जवाब मांग रहे है।
मामला चिंताजनक
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री तुलछाराम सिंवर ने बताया कि फर्जी गिरदावरी और फर्जी पंजीयन के आंकड़े चिंताजनक है। वैसे ही एक किसान से सरकार 40 क्विं टल तक उपज खरीद करती है। ऐसे में वास्तविक किसान को कितना लाभ मिलेगा, इस बात का अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि सरकार ने मूंग खरीद के लिए प्रदेश में 340, मूंगफली के लिए 302, सोयाबीन के लिए 79 और उड़द के लिए 151 खरीद केन्द्र बनाएं है।