अमरूद ऑयल: चमकती त्वचा, बढ़ती सेहत और किसानों की बंपर कमाई

नई दिल्ली 27-Jan-2026 03:53 PM

अमरूद ऑयल: चमकती त्वचा, बढ़ती सेहत और किसानों की बंपर कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। अमरूद का गुदा ही नहीं, बीज भी उपयोगी है। यह बात हम नहीं, कृषि वैज्ञानिक कह रहे है। क्योंकि, सौंफ, जीरे की तरह इसके बीज में भी ऑयल होता है। जो लाखों रूपए प्रतिकिलो के भाव बिक्री होता है। यह तेल स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ चेहरे की चमक तो बढ़ाता ही है। साथ ही, किसान की आमदनी भी। गौरतलब है कि कृषि वैज्ञानिकों ने अमरूद का तेल तैयार किया है। इस कार्य में अग्रणी भूमिका निभाई है केन्द्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के क्षेत्रीय केन्द्र, अबोहर (पंजाब) के वैज्ञानिकों ने। केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अंकित नाथ की माने तो अमरूद ऑयल एक नया उत्पाद है। कास्मेटिक इंडस्ट्रीज में इस ऑयल की अच्छी मांग है। उन्होंने बताया कि केन्द्र के द्वारा अमरूद किसानों की आय बढौत्तरी के लिए यह ऑयल तैयार किया गया है। क्योंकि, बाजार में इसकी कीमत लाखों में है। गौरतलब है कि संस्थान के द्वारा अमरूद से कैंड़ी, जैम, जेली, स्टीक, जूस, टॉफी, स्क्वेश, शर्बत सहित करीब 22 तरह के उत्पाद तैयार किए है। लेकिन, प्रदेश में गणतंत्र के 76 साल पूर्ण होने के उपरांत सरकार स्तर पर अमरूद प्रोसेसिंग की बात शुरू हुई है। जबकि, कृषि वैज्ञानिक शुरू से ही खाद्य, फल-सब्जी प्रसंस्करण पर जोर देते आ रहे है। इसके बावजूद हालात ढाक के तीन पात जैसे बने हुए है। इसके चलते किसानों को सी और डी ग्रेड़ फलों को बेचने के लिए संषर्ष और शोषण का शिकार होना पड़ता है। क्योंकि, फल-सब्जी कारोबारी ए और बी ग्रेड़ फलों की खरीद में रूचि दिखाते है। इस कारण किसानों को सी और डी ग्रेड़ फलों के उचित दाम नहीं मिल पाते है। ऐसे में किसानों की स्थिति का अंदाजा स्वत: ही लगाया जा सकता है।

एक किलो में 100 ग्राम ऑयल

उन्होंने बताया कि अमरूद के एक किलो बीज से 100 ग्राम ऑयल तैयार होता है। जबकि, एक किलो बीज संग्रहित करने के लिए औसतन 35 से 40 किलो फल की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि बीज से तेल निकालने के लिए पहले ही धोया जाता है। फिर डीहाइड्रेट किया जाता है। इसके बाद तेल निकालने की प्रक्रिया शुरू होती है। उन्होंने बताया कि इस ऑयल का उपयोग सौन्दर्य प्रसाधन उत्पाद तैयार करने में किया जाता है। यह ऑयल स्किन केयर में काफी उपयोगी है। वहीं, स्वास्थ्यवर्धक भी है। गिलास भर दूध में इस ऑयल की पांच बूंद मिलाकर पिया जा सकता है। गौरतलब है कि अमरूद का पल्प निकालने के बाद बीज को बेकार समझकर फेक दिया जाता है। 

1600 करोड़ कारोबार संभव

पिछले दिनों सवाईमाधोपुर में आयोजित अमरूद महोत्सव में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि सवाईमाधोपुर अमरूद की राजधानी बन चुका है। यहां करीब 11-12 हजार हैक्टयर क्षेत्र में अमरूद का उत्पादन हो रहा है। वहीं, सालाना 600 करोड़ का कारोबार। उन्होंने कहा कि यहां अमरूद प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना से अमरूद का सालाना कारोबार 1600 से 1700 करोड़ रूपए तक पहुंचने का अनुमान है। गौरतलब है कि उन्होने 150 करोड़ लागत से अमरूद प्रोसेसिंग प्लांट स्थापना की बात कही है। 

हलधर व्यू

सवाईमाधोपुर जिला कोटा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में है। यहां कृषि विज्ञान केन्द्र भी स्थापित है। वहीं, विश्वविद्यालय के पास कोटा में इनक्यूबेशन सेंटर भी स्थापित है। ऐसे में दोनों संस्थानों के मध्य आपसी साझेदारी को बढाने की संभावना देखी जा सकती है। इससे प्रोसेसिंग से जुड़ी तकनीक का आदान-प्रदान होगा तो किसानों के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग में रूचि रखने वाले युवाओं और उद्यमियों को भी लाभ मिलेगा। 


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