किसानों की बढ़ी कमाई ने बदली बाजार की दिशा

नई दिल्ली 19-Jan-2026 02:58 PM

किसानों की बढ़ी कमाई ने बदली बाजार की दिशा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

भारत में ग्रामीण बाजार शहरी बाजार की तुलना में तेज गति से बढ़ रहे हैं। हाल ही में वाहन डीलरों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाड़ा) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष 2024 में यात्री वाहनों की बिक्री वृद्धि में ग्रामीण बाजार शहरी बाजार से आगे निकल गया। शहरी बाजारों में यात्री वाहनों की बिक्री 8 फीसदी बढ़ी। वहीं ग्रामीण इलाकों में इसमें 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2025 में ग्रामीण बाजारों में कुल 44.7 लाख यात्री वाहन बिके। जबकि, साल 2024 में कुल 41 लाख वाहनों की बिक्री हुई। उल्लेखनीय है कि भारत के ग्रामीण परिवेश से संबंधित कई रिपोर्टों में रेखांकित हो रहा है कि किसानों की आमदनी बढऩे से गांवों में खपत बढ़ रही है और इससे ग्रामीण बाजार को रफ्तार मिल रही है। ग्रामीण गरीबी में कमी, छोटे किसानों की साहूकारी कर्ज पर निर्भरता में कमी और किसानों का जीवन स्तर बढऩे जैसी विभिन्न अनुकूलताओं से ग्रामीण बाजार मजबूती की राह पर आगे बढ़ रहा है। किसानों की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संगठन नाबार्ड द्वारा 11 दिसंबर को जारी आठवें चरण के ग्रामीण आर्थिक स्थिति और भावना सर्वेक्षण (आरईसीएसएस) में बताया गया है कि देश में पिछले एक साल में ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढऩे से खर्च करने की क्षमता और इच्छा दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

सर्वे के अनुसार 80 फीसदी ग्रामीण परिवारों द्वारा पिछले एक साल में अपनी खपत में वृद्धि की सूचना दी गई है। नाबार्ड के सर्वे के अनुसार, अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में खपत मेें तेजी उम्मीद बढ़ाने वाली है। निवेश और औपचारिक ऋ ण में भी रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है जो बढ़ती आय के समानुपातिक मानी जा सकती है। 29.3 फीसदी ग्रामीण परिवारों ने पिछले एक साल में पूंजीगत निवेश (खेती और गैर-खेती दोनों क्षेत्रों में) बढ़ाया है। बैंक, सहकारी संस्थाओं आदि से कर्ज लेने वाले परिवारों का हिस्सा 58.3 प्रतिशत हो गया, जो कि सितंबर 2024 में 48.7 प्रतिशत था। वस्तुत: ग्रामीण भारत के बाजार के तेजी से बढऩे के पीछे बढ़ती क्रयशक्ति, वास्तविक आय वृद्धि, जीएसटी सुधार, कम महंगाई और सरकारी योजनाओं के ग्रामीण लोगों को मिलते लाभ भी हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण सुधार, बेहतर कृषि उत्पादन, ग्रामीण वेतन वृद्धि, ग्रामीण उपभोग में बढ़ोतरी और कर सुधार जैसे घटकों के दम पर भारत के ग्रामीण बाजार तेजी से आगे बढ़े हैं। इसी तरह दुनिया की प्रसिद्ध एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स द्वारा प्रकाशित एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट 2025 के मुताबिक ग्रामीण भारत में महंगाई घटने और करों में कटौती से भारत की ग्रामीण खपत में सुधार हुआ है। इसी तरह आरबीआई द्वारा प्रकाशित ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में 76.7 फीसदी ग्रामीण परिवारों में उपभोग वृद्धि और 39.6 फीसदी परिवारों में आय में वृद्धि सामने आई है। यही नहीं, गरीबी पर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में गरीबी कम हुई है।

यह वर्ग अभी भी ऊंची ब्याज दर पर कर्ज ले रहा है। ऐसे में गांवों में बैंक शाखा विस्तार के अलावा दूसरे अन्य कदम उठाने की जरूरत है। ग्रामीण ऋण लागत कम करने और विश्वास बढ़ाने के लिए तकनीक का लाभ उठाया जाना होगा। औपचारिक ऋ णों के लिए बेहतर प्रोत्साहन और डिजिटल उपकरणों से लैस बैंक प्रतिनिधियों को ग्रामीण परिवारों और संस्थानों के बीच समन्वय का माध्यम बनाया जाना चाहिए। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) की भूमिका को प्रभावी बनाना होगा। गांवों में प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का तेजी से विस्तार करना होगा, इससे छोटे किसानों की संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ाई जा सकेगी।


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