बगीचे में मिश्रित खेती से बढ़ाएं किसान की आय, जानें आसान तरीका
(सभी तस्वीरें- हलधर)फलदार पौधों के मध्य कम बढ़वार वाली फसलों का उत्पादन करके किसान अपनी आय बढ़ा सकता है। बगीचे में एक फसल के मध्य दूसरी फसलों के उत्पादन को ही इंटर क्रॉपिंग कहा जाता है। गौरतलब है कि बगीचे में लगाये जाने वाले पौधे से 4-5 वर्ष बाद आमदनी होना शुरू होती है। इन वर्षों में किसान बगीचे के मध्य अंतरवर्ती फसलों की बुवाई करके आय के स्तर को बनाये रख सकता है।
यह रखे सावधानी
फसल लेने के लिए गहरी जुताई नहीं करें अन्यथा फलदार पौधों की जड़ को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। फलदार पौधे के चारों ओर ढाई फीट का क्षेत्र छोड़कर ही फसल लेनी चाहिये।
उन्हीं अंतरवर्ती फसल का चयन करें जो शीघ्र पकने वाली हों। साथ ही, छोटी और उथली जड़ वाली हों।
अंतरवर्ती फसल में खाद, उर्वरक, पानी और पौध संरक्षण जैसे कार्यों का विशेष ध्यान रखें। निराई-गुड़ाई के समय अवांछित पौधों को अलग करें।
अंतरवर्ती फसल ज्यादा बढ़वार वाली नहीं हो।
ऐसी फसल का चयन करें जिनमें कीट-रोग नियंत्रण का तरीका और रसायन फलदार पौधे में भी कारगर हो।
फलदार पौधों में फूल और फल बनना शुरू होने के साथ ही फसल उगाना बंद कर देना चाहिए।
फसल की स्थान बदलकर बुवाई करें।
अंतरवर्ती फसल की सिंचाई यथा संभव फलदार पौधों के अनुरूप होनी चाहिये।
बगीचे में सब्जी, दलहन और हरा चारा फसल का ही उत्पादन करें।
फलदार पौधेवार अंतरवर्ती सब्जियों का विवरण
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पौधे |
खरीफ |
रबी |
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आम |
बैंगन, टमाटर, मिर्च, चंवला, ग्वार, पपीता आदि |
मटर, गोभी, प्याज, मैथी, पालक, धनिया |
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अमरूद |
लोबिया, ग्वार, मूँग, उड़द, गाजर, बरसीम |
गोभी, मटर, मैथी, मूली |
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अनार |
मूँग, लोबिया, सब्जियाँ व दालें |
मटर, चना, मूली, गाजर |
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ऑवला |
मूँग, लोबिया |
मटर, चना, मूली, गाजर |
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बेर |
ग्वार, मूँग, लोबिया, मोठ, चंवला |
मटर, जीरा, मिर्च |
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नींबू |
लोबिया, सनई, ढैंचा, पपीता, करेला, सोयाबीन,सेम, टमाटर, भिण्डी |
गाजर, मूली, मटर, चना, मैथी |