ढैंचा से मिट्टी बनेगी उपजाऊ, जानें हरी खाद के फायदे और तरीका
(सभी तस्वीरें- हलधर)मृदा की उर्वरता और स्वास्थ्य बनाए रखना टिकाऊ कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है। लगातार एक ही फसल की खेती, रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग तथा खेत में जैविक पदार्थों की कमी के कारण मिट्टी की भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में ढैंचा को हरी खाद के रूप में उगाना मृदा स्वास्थ्य सुधारने की एक प्रभावी और कम लागत वाली तकनीक है।
ढैंचा क्यों है महत्वपूर्ण
ढैंचा एक तेजी से बढ़ने वाली दलहनी फसल है, जिसकी जड़ों में राइजोबियम जीवाणुओं की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है। इसे हरी खाद के रूप में खेत में पलटने से पौधों का जैविक पदार्थ मिट्टी में मिल जाता है और मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता और जैविक सक्रियता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
कैसे होता है मृदा स्वास्थ्य में सुधार
मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है: ढैंचा की हरी जैव मात्रा को खेत में मिलाने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिलती है।
नाइट्रोजन उपलब्धता में वृद्धि: दलहनी फसल होने के कारण ढैंचा वायुमंडलीय नाइट्रोजन को जैविक रूप से स्थिर करने में सक्षम होता है। हरी खाद के रूप में में इसे मिट्टी में मिलाने से आगामी फसल को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।
मिट्टी की संरचना में सुधार: ढैंचा की जड़ें मिट्टी को भुरभुरा बनाने और मिट्टी के कणों के बेहतर संगठन में योगदान देती हैं। इससे जड़ों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनता है।
जल धारण क्षमता में सुधार: मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ने से उसकी जल धारण क्षमता में सुधार हो सकता है। यह विशेष रूप से कम वर्षा वाले और शुष्क क्षेत्रों में उपयोगी है।
सूक्ष्मजीवों की सक्रियता: हरी खाद के रूप में ढैंचा मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ उपलब्ध कराता है, जिससे लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ावा मिलता है और पोषक तत्वों के चक्रण में सहायता मिलती है।
खरपतवार प्रबंधन में सहायता: ढैंचा तेजी से बढ़कर खेत की सतह को ढक लेता है, जिससे कई खरपतवारों की वृद्धि और प्रकाश प्राप्ति सीमित हो सकती है।
हरी खाद के रूप में कैसे अपनाएं
खेत की तैयारी के बाद पर्याप्त नमी की स्थिति में ढैंचा की बुवाई की जा सकती है। सामान्यतः इसे हरी खाद के लिए लगभग 40-50 दिन की अवस्था में, फूल आने से पहले अथवा प्रारंभिक फूल अवस्था के आसपास, खेत में पलटने की सलाह दी जाती है। इस समय पौधे अपेक्षाकृत कोमल होते हैं और उनका अपघटन तेजी से होता है। ढैंचा को खेत में पलटने के बाद पर्याप्त नमी बनाए रखना आवश्यक है, ताकि जैविक पदार्थ का उचित अपघटन हो सके। इसके बाद मुख्य फसल की बुवाई की जा सकती है।
किसानों के लिए विशेष सावधानी
ढैंचा की बुवाई और हरी खाद के रूप में उपयोग करते समय मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन करना अधिक वैज्ञानिक तरीका है। ढैंचा को केवल रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण विकल्प न मानते हुए इसे एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन का हिस्सा बनाना चाहिए। खेत की मिट्टी, वर्षा, फसल प्रणाली और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बुवाई एवं प्रबंधन की मात्रा निर्धारित करना उचित है।
अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उपयोगिता
राजस्थान जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मृदा में जैविक पदार्थ की कमी एक महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में उपलब्ध नमी का उचित प्रबंधन करते हुए ढैंचा को हरी खाद के रूप में अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे दीर्घकाल में मृदा की उत्पादकता एवं फसल प्रणाली की स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
अनिल कुमार, यंग प्रोफेशनल-1, बीएलएमसी,
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर