मानसून में पशुओं को साफ पानी और सुरक्षित चारा देना जरूरी 

नई दिल्ली 26-Aug-2026 02:32 PM

मानसून में पशुओं को साफ पानी और सुरक्षित चारा देना जरूरी 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मानसून में चारे और पानी की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। अचानक आहार बदलने अथवा दूषित चारा देने से पशुओं का पाचन तंत्र पूरी तरह बिगड़ सकता है।

  • हरे चारे का संतुलित उपयोग: बारिश के मौसम में बरसीम, मक्का अथवा ज्वार जैसे हरे चारे तेजी से बढ़ते हैं। अत्यधिक रसीला अथवा बहुत छोटा हरा चारा सीधे पशु को देने से उसमें अफरा और पेचिश की समस्या हो जाती है।

  • सूखे चारे का मिश्रण: हरे चारे में पानी की मात्रा अधिक होती है। इसलिए हमेशा हरे चारे के साथ सूखा कुट्टी-भूसा (1 : 3 या 1 : 2 के अनुपात में) मिलाकर ही पशुओं को खिलाएं।

  • फफूंदयुक्त चारे से बचाव: गीला भूसा अथवा दाना यदि कुछ दिनों तक रखा रहे, तो उसमें माइकोटॉक्सिन्स नामक जहरीले पदार्थ बन जाते हैं। ऐसा फफूंद लगा दाना अथवा चारा पशु को कभी न दें। इससे यकृत खराब हो सकता है और गर्भपात का खतरा रहता है।

  • संतुलित पशु आहार: दूध उत्पादन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 50-100 ग्राम अच्छी गुणवत्ता वाला मिनरल मिक्सचर और 30-50 ग्राम साधारण नमक चारे में अवश्य मिलाएं।

  • साफ-ताजा पेयजल: बरसात के पानी में बहकर आई गंदगी से पीने का पानी दूषित हो जाता है। पशुओं को सदैव हैंडपंप अथवा समरसेबल का साफ और ताजा पानी ही पिलाएं। पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें और उसमें लाल दवा का हल्का घोल डालें। 

 


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